फैक्ट्री में बड़ा हादसा : गर्म राख से 6 मजदूरों की मौत, 5 घायल, संचालन व मेंटेनेंस पर लगा प्रतिबंध

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– जिले में स्थित एक निजी प्लांट में बड़ा हादसा हो गया। प्लांट में हुए विस्फोट में गर्म राख की चपेट में आने से 6 मजदूरों की मौत हो गई, वहीँ 5 मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। हादसा सुबह करीब 9:40 बजे कोल भट्टी (कोल किल्न) क्षेत्र में हुआ।

जानकारी के अनुसार बलौदा बाजार जिले के बकुलाही स्थित स्पंज आयरन प्लांट में रोज की तरह हाउस कीपिंग का काम चल रहा था तभी डीएससी में डस्ट मटेरियल गिरा, जो काफी गर्म रहता है। डस्ट सेटलिंग चैंबर (DSC) से गर्म राख (ऐश) ले जा रही पाइपलाइन में लीकेज हो गया था। इसी दौरान अत्यधिक गर्म राख नीचे काम कर रहे मजदूरों पर गिर पड़ी, जिससे वे जिंदा जल गए। विस्फोट के बाद प्लांट परिसर में धुएं का घना गुबार फैल गया और अफरा-तफरी मच गई।

घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए बिलासपुर बर्न ट्रीटमेंट सेंटर भेजा गया है। प्रशासन ने बताया कि सभी मृतक बिहार के रहने वाले हैं, जिनकी पहचान आधार कार्ड के माध्यम से कर ली गई है। परिजनों को सूचना दे दी गई है। कंपनी ने मृतकों के परिजनों को 20 लाख और घायलों को 5 लाख मुआवजा देने की घोषणा की है।

संचालन व मेंटेनेंस पर लगा प्रतिबंध

प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कारखाना प्रबंधन द्वारा एसओपी का पालन नहीं किया गया। किल्न का शटडाउन किए बिना श्रमिकों से अत्यंत जोखिमपूर्ण स्थिति में कार्य कराया गया। डस्ट सेटलिंग चेंबर के हाईड्रोलिक स्लाइड गेट को बंद नहीं किया गया, उचित वर्क परमिट जारी नहीं किया गया, नियमित रखरखाव का अभाव रहा तथा श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण और हीट रेसिस्टेंट एप्रन, सुरक्षा जूते, हेलमेट जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए।

किल्न क्रमांक-01 में विनिर्माण प्रक्रिया एवं मेंटेनेंस कार्य इमिनेंट डेंजर की स्थिति में थे। जिसके चलते कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के अंतर्गत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं समस्त मेंटेनेंस कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध तब तक प्रभावशील रहेगा, जब तक कारखाना प्रबंधन द्वारा सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंधात्मक अवधि के दौरान कारखाने में नियोजित समस्त श्रमिकों को देय वेतन एवं अन्य भत्तों का भुगतान निर्धारित तिथि में अनिवार्य रूप से किया जाए।

मुख्यमंत्री ने जताया दुख

वहीं इस घटना को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक बताया है। मुख्यमंत्री ने इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता और मजबूती से खड़ी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शोकाकुल परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न हो तथा उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही, हादसे के कारणों की तथ्यपरक जांच सुनिश्चित करने के भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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