नाचा कलाकारों से बातचीत: कहा- दर्शकों की ताली ही हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान, कई बार तो रास्ते में सायकल से नींद में ही गिर जाते
रात भर नाचा गम्मत करते और सुबह साइकिल चलाते थे कई बार तो रास्ते में नींद में ही गिर जाते

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– राजिम कुंभ कल्प मेला में प्रतिदिन सैकड़ो कलाकार प्रस्तुति दे रहे हैं। एक तरह से यह मंच उनके लिए वरदान बन गया है। कार्यक्रम देने के बाद उनके चेहरे में जो चमक दिखाई दे रही है वह उल्लास और राजिम कुंभ के प्रति आस्था को दर्शाती है। गरियाबंद जिला के सुदूर अंचल में रहने वाले जय बहेड़ाबुड़ा नाचा पार्टी मोंगरा के फूल के 15 कलाकारों ने स्थानीय मंच में जोरदार प्रस्तुति दी। दर्शक उन्हे ताली बजाकर प्रोत्साहित करते रहे।
मीडिया सेंटर पहुंचे तीनों कलाकार जिसमें बड़े जोक्कर बुधारू राम यादव अपने उम्र के 60 वर्ष पूर्ण कर चुके हैं। वह बताते हैं कि संगीत की धुन बजने के बाद उनका पांव रुकता नहीं है बल्कि वह नाचना शुरू कर देते हैं चेहरे पर मृदाल शंख, माथे पर लंबा टीका, नीचे पजामा तथा ऊपर चमकीला कुर्ता पहनें इनके बात करने का ढंग काफी प्रभावित कर रहा था।
नींद में सायकल से गिर जाते
चर्चा करते हुए इन्होंने बताया कि 10 वर्ष की उम्र से नाचा पार्टी में जा रहा हूं पहले तो नचकारीन, उसके बाद छोटे जोक्कर और अब बड़े जोक्कर की भूमिका निभाता हूं। शुरुआत में तो 3 साल तक लगातार रिहर्सल ही करता रहा, उसके बाद 13 साल की उम्र से साइकिल चलाकर कलाकारी करने के लिए नाचा में जाता रहा हूं। सौ, दो सौ किलोमीटर साइकिल में ही जाया करते थे।
रात भर नाचा गम्मत करते और सुबह चाय पीने के बाद फिर साइकिल चलाते। साइकिल चलाते-चलाते नींद आ जाती थी तब गिर भी जाते थे, गिरकर संभालना और फिर अगले प्रोग्राम के लिए अपने आप को तैयार करना बहुत कठिन काम था। अस्सी नब्बे के दशक में खूब साइकिल चलाया हूं। शुरुआत में मुझे 3 रु मेहंताना मिलता था। बाद में 5 रु हुआ फिर 7 रु देने लगे। उस 7 रु को पाकर मुझे बहुत खुशी होती थी। फिर दो कोरी (40 रु) मिला और अब तो 2000 तक मिल जाते हैं।
12 साल की उम्र से कर रहे कलाकारी
नजरिया नाचा विधा की जान होती है जैसे ही दो जोक्कर आते हैं फिर नजरिया को बुलाया जाता है इन्हें देखने के लिए पूरा दर्शक काफी समय से इंतजार करते रहते हैं और जब जनाना आती है तो लोग साइलेंट हो जाते हैं और आवाज सिर्फ दर्शकों के बीच से इन्हीं की आती है। 65 वर्षीय दौलत राम यादव पिछले 50 साल से नाचा पार्टी में नजरिया की रोल निभाने आ रहे हैं। इन्होंने चर्चा के दौरान बताया कि तौरेंगा के सरपंच शिवदयाल ध्रुव मेरे गुरु थे वह इस समय इस दुनिया में नहीं है लेकिन इनके द्वारा दी हुई कला आज भी कला मंच में जिंदा है। शुरुआत में मैं डांसर का काम कर रहा था फिर बाद में नजरिया बनना मुझे बहुत ही अच्छा लगा।
सम्मान की बात पर इन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय मुझे कोई सम्मान नहीं मिला है, कई जगह प्रमाण पत्र हालांकि दिए गए हैं लेकिन दर्शकों की ताली ही हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है। छत्तीसगढ़ में इन्होंने नाचा पार्टी के माध्यम से कलाकारी तो दिखाएं हैं। लेकिन जब पहली बार महाराष्ट्र गए, वहां का रहन-सहन और लोगों के बात करने का ढंग इन्हें बहुत ही आश्चर्यजनक लगा। इनका कहना है कि छत्तीसगढ़ के लोग बड़े ही सरल स्वभाव के होते हैं मिलजुल कर रहते हैं लेकिन वहां ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। मुझे संस्कृति विभाग के द्वारा पेंशन मिलता है कलाकारों के संरक्षण के लिए सरकार और कोई नई योजना लाए ताकि कला और कलाकार का जीवन स्तर ऊंचा उठे।
लीला मंडली से नाचा पार्टी का सफर अच्छा लगता है
इसी नाचा पार्टी में छोटे जोक्कर की भूमिका निभा रहे उमेन्द्र निर्मलकर ने बताया कि हारमोनियम मास्टर पीतांबर विश्वकर्मा मेरे गुरु है उनके साथ लगातार बहेराबुडा नाचा पार्टी में नाचा गम्मत किया हूं। पहले मैं लीला मंडली में कॉमेडियन की किरदार निभाता था। इन्हें देखकर नाचा पार्टी में एंट्री मिली। मैं पढ़ा लिखा नहीं हूं। आज तक स्कूल नहीं गया हूं। कला के जरिए अब बहुत कुछ जान लेता हूं। कुंभ मेला का यह मंच कलाकारों के लिए वरदान है। ज्यादा से ज्यादा स्थानीय कलाकारों को मंच मिले, इससे प्रदेश के कलाकार आगे बढ़ेंगे। इन्होंने छत्तीसगढ़ी में जनउला बोलकर सबको चौंका दिया।
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