छात्र संगठन AIDSO स्थापना दिवस : विभिन्न शिक्षा समस्याओं को लेकर छात्रों ने रखी अपनी बात, कहा…

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– छात्र संगठन AIDSO के 72वें स्थापना दिवस के अवसर पर राजिम में गरियाबंद जिला कमेटी द्वारा छात्र सभा आयोजित किया गया । कार्यक्रम की शुरुआत क्रांतिकारी महापुरुषों के याद में बनी शहीद वेदी पर पुष्पर्पण करके किया गया । इसके बाद छात्रों – युवाओं ने शिक्षा संबंधी अपने सवाल रखे साथी ही उन्होंने इन समस्याओं पर भी अपनी बात रखी।

गरियाबंद जिला अध्यक्ष नंदकिशोर साहू ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आज शिक्षा में समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है गवर्नमेंट पूरी तरह से तानाशाही हो चुकी है स्कूल कॉलेज में मूलभूत चीज मौजूद नहीं है साथी शिक्षकों व प्राध्यापकों के भारी कमी है। जो शिक्षक- प्राध्यापक थोड़े बहुत ही स्कूल कॉलेज में है उन्हें भी गैर शैक्षणिक कामों पर लगाया जा रहा है जैसे की SIR , सांप बिच्छू, आवारा कुत्ते भागना का काम करना। फीस वृद्धि भी लगातार हो रही है कॉलेज में शाला प्रबंधन समिति के नाम पर लूट चल रहा है।

साय सरकार द्वारा वादा करने के बावजूद पिछले दो सालों से 57,000 शिक्षक भर्ती नहीं कर रही है। इसके बाद गरियाबंद जिला सचिव जीवन साहू ने अपनी बात रखते हुए कहा की किस तरह शिक्षा महत्वपूर्ण है सभ्य समाज की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था में होती है शिक्षा केवल ज्ञान का संचार ही नहीं करती बल्कि तार्किकता वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय मूल्यों का निर्माण भी करती है और हम देख पा रहे हैं कि विभिन्न शिक्षा समस्याएं आज भी मौजूद है।

लचर बनाया जा रहा है

अंग्रेज शासको के दौर से चली आ रही है जो स्वतंत्रता के बाद भी खत्म नहीं हुई है आजादी आंदोलन के दौरान विभिन्न क्रांतिकारियों व महापुरुषों ने जैसे नेताजी सुभाषचंद्र बोस ,भगत सिंह ,चंद्रशेखर आजाद, प्रीति लता ,अशफाक उल्ला खान ,मुंशी प्रेमचंद ,रविंद्रनाथ टैगोर तथा सुब्रमण्यम भारती ने जनवादी वैज्ञानिक में धर्मनिरपेक्ष शिक्षा की मांग की थी लेकिन तात्कालिक शासको से लेकर वर्तमान शासको तक शिक्षा व्यवस्था को ऊपर उठने के बजाय गर्त में ही धकेला गया है सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लगातार लचर बनाया जा रहा है।

राज्य कार्यालय सचिव मेनका निषाद ने अपनी बात रखी जिसमें उन्होंने बताया कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में मूलभूत कमी होने के कारण यह स्थिति देखी जा रही है जैसे पाठ्य पुस्तकों में क्रांतिकारी , महापुरुषों व लोकतांत्रिक जैसे पाठ में कटौती ।राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नाम पर स्कूलों को बंद करना। सरकार छत्तीसगढ़ राज्य में लगभग 10,463 सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। कॉलेज में सेमेस्टर सिस्टम और उनको ऑटोनॉमस कर रही है। साथ ही आंगनवाड़ी को फाउंडेशन कोर्स के नाम पर स्कूली शिक्षा के साथ जोड़ा जा रहा है। इससे सिर्फ पूंजीपतियों के प्राइवेट स्कूल, कॉलेजों को ही फायदा होगा।

एक बेहतर समाज दे सके

हमारा मानना है कि शिक्षा समाज का मूल आधार होती है, समाज में उच्च नीति नैतिकता व मानवीय मूल्यबोध स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा हासिल कर छात्र-छात्राएं इंसानियत हासिल कर पाते हैं साथ ही उन्होंने दिन प्रतिदिन महिलाओं बच्चों पर बढ़ते अपराध पर भी बात की । एक तरफ सरकार 67 नए शराब दुकान खोल रही है दूसरी तरफ स्कूल को बंद कर रही है।

उन्होंने कहा कि हमारा छात्र संगठन शुरुआत से ही शैक्षिक समस्याओं को लेकर के संघर्षरत है और क्रांतिकारी महापुरुषों के विचारों को लेकर के छात्रों युवाओं के साथ आंदोलन गठित कर रहा है उन्होंने अपील की कि हम सभी को शिक्षा को बचाने के लिए एक जोरदार सचेत आंदोलन खड़ा करने की जरूरत है जिससे कि हम आने वाली पीढ़ी को एक बेहतर समाज दे सके।

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