राजिम कुम्भ कल्प 2026: चार धाम यात्रा के साथ 12 ज्योतिर्लिंग के होंगे एक साथ दिव्य दर्शन, जानिए भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग और उनकी विशेषताएं
संस्कृति, संस्कार और समृद्धि का प्रतीक राजिम कुम्भ कल्प 2026

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– पवित्र त्रिवेणी संगम पर आयोजित होने वाले राजिम कुम्भ कल्प 2026 को भव्य, सुव्यवस्थित और स्मरणीय बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ तैयारियों में जुटा हुआ है। मेला क्षेत्र में सभी कार्य युद्ध स्तर पर किए जा रहे हैं, ताकि समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ व्यवस्थाएं पूर्ण की जा सकें।
राजिम कुम्भ कल्प के मेला स्थल को इस वर्ष विशेष रूप से चार धाम यात्रा और 12 ज्योतिर्लिंगों के दिव्य दर्शन की थीम पर सजाया जा रहा है, जो सनातन परंपरा और धार्मिक आस्था का प्रतीक होगी। मंच की संरचना में धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक तत्वों का समावेश किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को चार धाम यात्रा की अनुभूति प्राप्त हो सके।
मेला स्थल पर किए जा रहे समस्त कार्यों के लिए विशेषज्ञों की टीम गठित की गई है। इन विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में मंच निर्माण, सजावट, विद्युत व्यवस्था, मार्ग प्रकाश, सुरक्षा एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं को सुसंगठित रूप से विकसित किया जा रहा है। मेला क्षेत्र का स्वरूप दिन-प्रतिदिन आकर्षक और व्यवस्थित होता जा रहा है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में राजिम कुम्भ कल्प 2026 की संपूर्ण संरचना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सांस्कृतिक गरिमा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। राजिम कुम्भ कल्प 2026 को प्रदेश के धार्मिक एवं सांस्कृतिक मानचित्र पर एक भव्य आयोजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रशासन सतत प्रयासरत है।
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग और उनकी विशेषताएं-
1. सोमनाथ (गुजरात)
पहला ज्योतिर्लिंग, जहां चंद्रदेव ने भगवान शिव की आराधना की थी।
2. मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश)
मान्यता है कि यहां शिव-पार्वती दोनों का वास है, इसे शक्तिपीठ भी माना जाता है।
3. महाकालेश्वर (उज्जैन)
12 ज्योतिर्लिंग में यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, इस मंदिर की भस्म आरती प्रसिद्ध है।
4. ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)
यह मंदिर ओंकार पर्वत पर स्थित है, जिसका आकार “ॐ” जैसा है।
5. केदारनाथ (उत्तराखंड)
हिमालय की गोद में यह मंदिर पांडवों द्वारा निर्मित है, यह चारधाम का भाग भी है।
6. भीमाशंकर (महाराष्ट्र)
सह्याद्री पर्वत में स्थित यह मंदिर भीमासुर वध की कथा से जुड़ा है।
7. काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश)
वाराणसी स्थित इस मंदिर को मोक्षदायिनी और शिव का दिव्य धाम माना जाता है।
8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
नासिक में स्थित यह मंदिर गोदावरी नदी का उद्गम स्थल है।
9. बैजनाथ (झारखंड)
देवघर का बैजनाथ धाम रावण द्वारा शिव की आराधना से जुड़ा है।
10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (गुजरात)
द्वारका के निकट स्थित इस मंदिर को नाग से रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
11. रामेश्वरम (तमिलनाडु)
भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित इस मंदिर में 22 तीर्थ कुंड है।
12. घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र)
औरंगाबाद के एलोरा गुफाओं के पास यह मंदिर बारहवां एवं अंतिम ज्योतिर्लिंग है।
चार धाम यात्रा
चार धाम यात्रा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक मानी जाती है। यह यात्रा उत्तराखंड राज्य में स्थित चार प्रमुख तीर्थ स्थलों—यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ—तक की जाती है। इन धामों का संबंध क्रमशः माता यमुना, माता गंगा, भगवान शिव और भगवान विष्णु से है।
मान्यता है कि चार धाम यात्रा करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस यात्रा की शुरुआत प्रायः यमुनोत्री से होती है, जहाँ से यमुना नदी का उद्गम माना जाता है। इसके बाद श्रद्धालु गंगोत्री पहुँचते हैं, जो पवित्र गंगा नदी का उद्गम स्थल है। तीसरा धाम केदारनाथ है, जो भगवान शिव को समर्पित है और हिमालय की गोद में स्थित होने के कारण अत्यंत कठिन लेकिन आस्था से भरी यात्रा मानी जाती है। अंतिम धाम बद्रीनाथ है, जहाँ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
चार धाम यात्रा सामान्यतः अप्रैल या मई में अक्षय तृतीया के अवसर पर शुरू होती है और अक्टूबर–नवंबर में शीतकाल के कारण बंद हो जाती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से इस यात्रा में भाग लेते हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता और भारतीय संस्कृति का भी अद्भुत अनुभव कराती है।
छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/Ihl8c6n3whwBoOjrVkYYRS











