आस्था का महाकुंभ : राजिम कुंभ कल्प में एक ही स्थल पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों के हो रहे सहज दर्शन, श्रद्धालुओं ने कहा ..

गरीबों के लिए वरदान साबित हो रहा द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– राजिम कुंभ कल्प मेला में श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम साकार हुआ है। महानदी आरती घाट स्थित लक्ष्मण झूला से लेकर नवीन मेला मैदान तक के कनेक्टिंग रोड पर भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्थापित किए गए हैं, जहां श्रद्धालु एक ही स्थान पर देशभर के पवित्र ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर पा रहे हैं।

यहां स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिंग भारत के सबसे प्राचीन एवं पवित्र स्वयंभू शिवलिंगों का प्रतीक हैं। इनमें सोमनाथ (गुजरात), मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश), महाकालेश्वर (उज्जैन), ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश), बैद्यनाथ (झारखंड), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), रामेश्वरम (तमिलनाडु), नागेश्वर (गुजरात), काशी विश्वनाथ (वाराणसी), त्र्यंबकेश्वर (नासिक), केदारनाथ (उत्तराखंड) और घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) शामिल हैं। ये सभी ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

सामान्यतः इन सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए देशभर की लंबी और खर्चीली यात्रा करनी पड़ती है, लेकिन राजिम कुंभ कल्प पर्व में राज्य शासन के विशेष प्रयासों से इनका स्वरूप एक ही जगह पर साकार कर दिया गया है। इससे श्रद्धालुओं को कम समय में सहज और सुलभ रूप से द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पुण्य लाभ मिल रहा है।

प्रत्येक ज्योतिर्लिंग के साथ संबंधित मंदिरों का सजीव चित्रण किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को वहां की धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभूति भी प्राप्त हो रही है। इसके अतिरिक्त नवीन मेला मैदान स्थित घाट पर भगवान शिव की 22 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जो दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है और मेले का मुख्य आकर्षण बनी हुई है।

श्रद्धालुओं में दिख रहा विशेष उत्साह

द्वादश ज्योतिर्लिंगों के एक साथ दर्शन की व्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। मेले में पहुंचे कवर्धा जिले के मोहेन्द्र, दीपक, रामसिंग और नागेन्द्र ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि वे देशभर में स्थित सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सकें, लेकिन राजिम कुंभ में मात्र आधे घंटे के अंतराल में ही सभी द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन हो गए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था गरीब और सामान्य श्रद्धालुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

वहीं महिला श्रद्धालुओं सीता साहू, राम्हीन बाई, चेतना, दीपमाला बिसाहिन और रामकली ने बताया कि कुंभ के अवसर पर वे पहली बार राजिम पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि मेला क्षेत्र में घूमते-घूमते पैर थक जाते हैं, लेकिन व्यवस्था और आयोजन देखकर सारी थकान दूर हो जाती है। इतने विशाल और भव्य आयोजन के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

श्रद्धालुओं ने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भगवान आशुतोष को स्मरण करने का एक सशक्त माध्यम है। वैसे भी राजिम को हरि और हर की नगरी कहा जाता है, जहां आकर आध्यात्मिक अनुभूति स्वतः प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ कल्प में द्वादश ज्योतिर्लिंगों के एक साथ दर्शन ने इस धार्मिक आयोजन को और भी विशेष बना दिया है।

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