छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू की दस्तक: इस जिले में संक्रमण की पुष्टि, प्रशासन अलर्ट मोड पर

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) का मामला सामने आया है, जिसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। शासकीय कुक्कुट पालन प्रक्षेत्र कोनी में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी संजय अग्रवाल ने तत्काल प्रभाव से सख्त नियंत्रण और रोकथाम के निर्देश जारी किए हैं। पूरे जिले को अलर्ट मोड पर रखते हुए व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
4 हजार से अधिक मुर्गियों की हो चुकी मौत
दरअसल, बिलासपुर जिले के कोनी क्षेत्र स्थित फार्म में बीते छह दिनों में 4,400 मुर्गियों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, फार्म में कुल 5,037 मुर्गियां थीं, जिनमें से 19 मार्च से 24 मार्च के बीच बड़ी संख्या में मौतें हुईं। मृत मुर्गियों के सैंपल भोपाल और पुणे की प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे, जहां एवियन इन्फ्लूएंजा की पुष्टि कर दी गई। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत रोकथाम के उपाय तेज कर दिए।
रैपिड रिस्पांस टीम का गठन
बिलासपुर कलेक्टर ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग के Revised Action Plan for Prevention & Containment of Avian Influenza 2021 के तहत सभी विभागों को समन्वय के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत रैपिड रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है, जो संक्रमित पक्षियों की कूलिंग (नष्ट करने), सुरक्षित निपटान, निगरानी और प्रभावित क्षेत्र में सघन कीटाणुशोधन का कार्य करेंगी।
संक्रमित और सर्विलांस जोन घोषित
प्रशासन ने संक्रमण वाले क्षेत्र के 1 किलोमीटर दायरे को संक्रमित जोन तथा 10 किलोमीटर के दायरे को सर्विलांस जोन घोषित कर दिया है। इन क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं और कुक्कुट पक्षियों के आवागमन व बिक्री पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। राजस्व, पुलिस, नगरीय प्रशासन और पंचायत विभाग के संयुक्त प्रयास से कूलिंग एवं डिस्पोजल की कार्रवाई शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाएगी।
प्रतिदिन शासन को भेजा जाएगा रिपोर्ट
मरे हुए पक्षियों और अपशिष्टों का निपटान जैव सुरक्षा मानकों के तहत किया जाएगा। साथ ही कुक्कुट फार्म में कार्यरत कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखी जा रही है। लक्षण पाए जाने पर सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे और जरूरत पड़ने पर एंटीवायरल दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके अलावा जिले के सभी पोल्ट्री विक्रय केंद्रों की सतत निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने पशु चिकित्सा, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, लोक निर्माण और पुलिस विभाग को आपसी समन्वय से त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने को कहा है। संयुक्त संचालक, पशु चिकित्सा विभाग को रोजाना की कार्रवाई की रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बिलासपुर जिला दंडाधिकारी ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें, सतर्कता बरतें और प्रशासन का सहयोग करें, ताकि इस संक्रमण को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
क्या है बर्ड फ्लू?
बर्ड फ्लू एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से पक्षियों विशेषकर मुर्गी, बतख और अन्य कुक्कुट प्रजातियों को प्रभावित करता है। यह इन्फ्लुएंजा ए वायरस के कारण फैलता है। कुछ मामलों में यह वायरस इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है, जो गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
कैसे फैलता है संक्रमण?
विशेषज्ञों के अनुसार बर्ड फ्लू संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। उनके मल, लार, पंख या दूषित वातावरण के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैल सकता है। पोल्ट्री फार्म, पक्षी बाजार और संक्रमित पानी इसके प्रमुख स्रोत माने जाते हैं। बर्ड फ्लू का सबसे बड़ा असर पोल्ट्री उद्योग पर पड़ता है। संक्रमण फैलने पर बड़ी संख्या में पक्षियों को नष्ट करना पड़ता है, जिससे किसानों और व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान होता है।
वहीं इंसानों में संक्रमण होने पर बुखार, खांसी, सांस लेने में दिक्कत जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जो कभी-कभी जानलेवा भी साबित होतीहैं। इसके अलावा चिकन और अंडे के व्यापार पर भी असर पड़ता है।
क्या हैं बचाव के उपाय?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बर्ड फ्लू से बचाव के लिए संक्रमित पक्षियों से दूरी बनाना जरूरी है। चिकन और अंडे पकाने से बचना चाहिए। इसके अलावा पोल्ट्री फार्म में साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत प्रशासन या पशु चिकित्सा विभाग को सूचना देना चाहिए।
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