रक्षाबंधन पर्व पर शुभ संयोग, राखी बांधने के लिए ये दो समय हैं वर्जित, जानिए राखी बांधने के शुभ मुहूर्त

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :- रक्षाबंधन का त्योहार इस वर्ष कई शुभ संयोगों में पड़ा है। 19 अगस्त रक्षाबंधन के दिन सावन सोमवार और श्रावण पूर्णिमा भी है। रक्षाबंधन पर ये दो महत्वपूर्ण व्रत है। हिन्दी पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि में रक्षाबंधन का त्योहार मनाते है। लेकिन इस त्योहार में भद्रा का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है । इस वर्ष 7 घंटे 39 मिनट तक भद्रा का साया है।
ज्योतिष भूषण पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि रक्षा बन्धन का पर्व भद्रा मुक्त होकर मनाया जाता है । भद्रा रविवार की रात्रि 3 बजकर 4 मिनट पर लग रही है जो कि सोमवार को दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। इसके बाद ही रक्षा बंधन का पर्व मनाना श्रेयस्कर होगा। उन्होंने कहा कि इस दिन श्रवण नक्षत्र और शोभन योग लेकर आई पूर्णिमा सर्व सुखकारी है, भद्रा भी जो है वह भूलोक की नही, पाताल लोक की है जो शुभकारी है। बहनों को इस दिन का विशेष रूप से इंतज़ार रहता है, वे अपने भाइयों की प्रतीक्षा करती है। भाइयों को राखी बांध कर उनका मुंह मीठा कराती है।
राखी बांधने के लिए ये 2 समय हैं वर्जित
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन पर्व पर राखी बांधने के लिए दो समय का हमेशा त्याग किया जाता है। पहला है भद्रा और दूसरा है राहुकाल। इन दोनों समय में कभी भी राखी नहीं बांधनी चाहिए। ये दोनों ही अशुभ समय माना जाता है। रक्षाबंधन के दिन राहुकाल सुबह 07:31 am से 09:08 am तक है।
इसी तरह 18 अगस्त की रात 2 बजकर 21 मिनट पर भद्रा लग जाएगी जो 19 अगस्त सुबह 09 बजकर 51 मिनट से 10 बजकर 53 मिनट तक पुंछ रहेगा। सुबह 10 बजकर 53 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 37 मिनट तक भद्रा मुख रहेगा। इसके बाद, भद्रा का समापन दोपहर 1 बजकर 30 पर होगा।
भद्रा में क्यों नहीं बांधी जाती है राखी
रक्षाबंधन पर भद्राकाल में राखी क्यों नहीं बांधनी चाहिए इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। ऐसा कहा जाता है कि लंकापति रावण की बहन ने भद्राकाल में ही उनकी कलाई पर राखी बांधी थी और एक वर्ष के अंदर उसका विनाश हो गया था। ऐसा कहा जाता है कि भद्रा शनिदेव की बहन थी। भद्रा को ब्रह्मा जी से यह श्राप मिला था कि जो भी भद्रा में शुभ या मांगलिक कार्य करेगा, उसका परिणाम अशुभ ही होगा।
Raksha Bandhan 2024 Shubh Muhurat राखी बांधने के शुभ मुहूर्त
19 अगस्त को राखी बांधने का सबसे खास मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 43 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 20 मिनट तक रहेगा, आप उसमें राखी बंधवा सकते हैं. राखी बांधने के लिए कुल आपको 2 घंटे 37 मिनट का समय मिलेगा, जो कि सबसे शुभ समय माना जा रहा है । इसके बाद शाम के समय प्रदोष काल में भी भाई की कलाई पर राखी बांध सकते है। इस दिन शाम 06 बजकर 56 मिनट से रात 09 बजकर 07 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा।
पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने कहा कि सतयुग के देवासुर संग्राम के समय विजय और रक्षा की कामना से देवराज इन्द्र की पत्नि शची ने अपने पति को रक्षा सूत्र बांधा था। द्वापर में चीर हरण के समय श्री कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा की थी क्योंकि एक बार श्री कृष्ण के चोटिल होने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का लीर चीर कर उनकी कलाई पर बांधा था इसी सनातन परम्परा को हमारे ऋषि गण एवं ब्राह्मण देवता राजा महाराजाओं को विभिन्न आपदाओं से मुक्ति दिलाने के नाम पर अभिमंत्रित रक्षा सूत्र बांधते रहे हैं यह सनातन परम्परा आज भी जीवित है।
बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और भाई अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं। इस दिन सनातनी लोग प्रायश्चित कर्म करते हैं विशेष रूप से ब्राह्मण लोग श्रावणी उपाकर्म दशविध स्नान, दान और नया यज्ञोपवीत धारण करके करते हैं हमारे यहां हमारे समाज और देश की रक्षा में सजग प्रहरी बनें पुलिस के लोगों, फौजी भाइयों एवम जन प्रतिनिधियों को भी राखी बांधने की परम्परा है।
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