श्रद्धा पर भारी पड़ी अव्यवस्था: मकर संक्रांति पर राजिम त्रिवेणी संगम में आस्था का सैलाब, लेकिन बदहाल व्यवस्थाओं ने तोड़ा भक्तों का मन

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– छत्तीसगढ़ के प्रयाग कहे जाने वाले राजिम स्थित पावन त्रिवेणी संगम में मकर संक्रांति के अवसर पर आज श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। ब्रह्म मुहूर्त से ही हजारों भक्तों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई और दीप प्रज्वलन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। स्नान के पश्चात बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्री राजीव लोचन एवं श्री कुलेश्वरनाथ मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था भारी पड़ती नजर आई और स्नान-दान का यह पर्व पूरे श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया।

लेकिन दूसरी ओर, इस पावन पर्व पर राजिम त्रिवेणी संगम की बदहाली ने श्रद्धालुओं की श्रद्धा को गहरी ठेस पहुंचाई। संगम स्थल का पानी बेहद मटमैला और दूषित नजर आया। चारों ओर कचरा, प्लास्टिक और गंदगी फैली हुई थी। हालात ऐसे थे कि हजारों श्रद्धालु मजबूरी में इसी दूषित जल में स्नान करने को विवश हुए, जबकि कई भक्तों ने केवल जल छिड़ककर ही पूजा-अर्चना पूरी की।
व्यवस्थाओं पर खुलकर जताई नाराजगी

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा सहित अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने प्रशासन की व्यवस्थाओं पर खुलकर नाराजगी जताई। जबलपुर मप्र से आए जगदीश मांझी ने कहा, “हम सैकड़ों किलोमीटर दूर से इतनी श्रद्धा लेकर आए थे, लेकिन यहां आकर पानी की हालत देखकर दिल टूट गया। यह कैसा पवित्र तीर्थ है, जहां सफाई तक की कोई व्यवस्था नहीं?”
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि हर साल मकर संक्रांति पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, इसके बावजूद प्रशासन द्वारा सफाई, शौचालय, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की जाती है। परिणामस्वरूप “छत्तीसगढ़ का प्रयागराज” कहे जाने वाला राजिम हर बार की तरह इस बार भी अव्यवस्था का शिकार नजर आया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि जहां एक ओर वे आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करने आते हैं, वहीं दूसरी ओर अव्यवस्थित और दूषित माहौल उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इन गंभीर शिकायतों से कोई सबक लेता है या हर साल की तरह यह मुद्दा भी भीड़ के साथ ही ठंडा पड़ जाएगा।
बुनियादी व्यवस्थाएं धरातल पर नहीं

एक तरफ शासन द्वारा राजिम कुंभ में करोड़ों रुपये खर्च कर राजिम की ख्याति देश-प्रदेश तक फैलाने का दावा किया जाता है, लेकिन जब दूसरे राज्यों से श्रद्धालु पूरी आस्था और विश्वास के साथ यहां पहुंचते हैं और उन्हें गंदगी व अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है, तो उनके मन में कैसी पीड़ा होती होगी — यह गंभीर विचार का विषय है। ऐसे हालात में राजिम की छवि न सिर्फ श्रद्धालुओं के मन में धूमिल होती है, बल्कि प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतिष्ठा पर भी प्रश्नचिह्न लग जाता है।
पवित्र तीर्थ की यह बदहाल तस्वीर बाहर से आए श्रद्धालुओं के मन में राजिम की नकारात्मक छवि छोड़ जाती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि करोड़ों की योजनाएं आखिर किस उद्देश्य से बनाई जाती हैं, जब सबसे महत्वपूर्ण पर्वों पर बुनियादी व्यवस्थाएं तक धरातल पर नजर नहीं आतीं।
तीर्थ नगरी के नाम पर जिस स्थान को आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बताया जाता है, यदि वहीं बुनियादी सुविधाओं का अभाव हो, तो यह प्रशासनिक उदासीनता का सबसे बड़ा प्रमाण बन जाता है। स्थानीय राजिम प्रशासन को भी जिम्मेदारी लेकर इस पर पहल करनी चाहिए कि राजिम की पहचान केवल आयोजनों और विज्ञापनों तक सीमित न रहे, बल्कि स्वच्छता, सुव्यवस्था और श्रद्धालुओं के सम्मान के रूप में भी देशभर में स्थापित हो।
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