अक्षय तृतीया : अक्ति तिहार कल, बच्चों द्वारा गुड्डे-गुड़िया के शादी की रस्में शुरू, अक्षय तृतीया अबूझ और स्वयं सिद्ध मुहूर्त – पं. शास्त्री

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :- अक्षय तृतीया का पर्व कल 10 मई को मनाया जाएगा। ऐसे में बाजार में गुड्डे-गुड़िया सहित उनके विवाह व रस्मों में उपयोग की जाने वाली सामग्री की बिक्री शुरू हो गई है। अक्षय तृतीया के दिन गुड्डे-गुड़िया की शादी नन्हें बच्चों द्वारा पूरे रीति रिवाज के साथ कराई जाती है। कई जगहों पर आज से ही गुड्डे-गुड़िया के शादी की रस्में शुरू हो चुकी है । वहीं साल भर में सबसे ज्यादा विवाह इसी दिन होते हैं। अक्षय तृतीया के दिन को शुभ माना जाता है । अक्ति तिहार से ही किसान अपने बुआई कार्य का शुभारंभ करता है ।
ऐसे में इस दिन मुहूर्त हो या न हो लेकिन सबसे ज्यादा शादी इसी दिन होती है। इस अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहर में भी बड़ी संख्या में विवाह होंगे। इसके चलते छत्तीसगढ़ी रस्मों-रिवाज से होने वाली शादियों में रेडिमेड बांस से बने सूपा, पर्स, टोकनी, तोरण, कटार, रंग-बिरंगी पंखे, सितारों से बने मोर-मुकुट के अलावा पूजन सामग्री और दूल्हा-दुल्हन के लिए कपड़े का बाजार सज चुका है।
कु. डिम्पल, कु.ख़ुशी, कु.ओजश्वी, कु.भारती, कु.दीपा, कु.संजू, कु.संगीत, कु.गीतांजलि ने अक्ति तिहार में गुड्डे गुड़िया का विवाह रचाया है । जिसमे आज से ही तेल हल्दी की रस्म निभाई जा रही है । बच्चों ने बताया कि हमारे लफन्दी गाँव के लगभग 20 घरों में शादी हो रही है जो छोटे छोटे बालिकाओं द्वारा किया जा रहा। इसमें बड़े, महिला पुरुष भी सहयोग प्रदान कर रहे है, ऐसा आयोजन होने से गांव में सुख समृद्धि आती है और हम छोटे बच्चों को विवाह की परम्परागत जानकारी होती है।

अक्षय तृतीया अबूझ और स्वयं सिद्ध मुहूर्त
अक्षय तृतीया को लेकर ज्योतिष भूषण पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि ना क्षय इति अक्षय, इसे चिरंजीवी तिथि भी कहते हैं, अक्षय तृतीया हमारे आराध्य, इष्टदेव भगवान परशुरामजी की जन्म तिथि है । उन्होंने कहा कि आम जन मानस में यह जिज्ञासा है कि आज विवाह का मुहूर्त है या नही क्योंकि गुरु एवं शुक्र का तारा अस्त है और शादी विवाह आदि मांगलिक कार्यों पर 3 जुलाई तक विराम लगा हुआ है । शास्त्रीजी ने स्पष्ट किया कि यद्यपि ज्योतिष की दृष्टि से मुहूर्त नही बनता किंतु अक्षय तृतीया को देव लग्न माना गया है, यह साल में आने वाले साढ़े चार मुहूर्तों में से एक हैं, जो कि अबूझ और स्वयं सिद्ध माने गए हैं । इसलिए आज विवाह के लिए यह मुहूर्त प्रशस्त है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति विशेष के लिए किसी कार्य प्रयोजन की सिद्धि व सफलता के लिए मुहूर्त शोधन किया जाता है । एक मुहूर्त दो घटी अर्थात 48 मिनट का होता है । पंचांग के 5 अवयव तिथि, वार, योग, करण व नक्षत्र की अनुकूलता से लग्न शुद्धि की जाती है, वर का सूर्य, कन्या का गुरु एवं दोनों का चंद्र बल देखकर मुहूर्त निकाला जाता है । किंतु आज देव लग्न में यह सब करने की जरूरत नहीं इसलिए मुहूर्त ना होने पर भी कुछ विशेष अबूझ मुहूर्तों में शादी ब्याह किए जा सकते हैं जैसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विजया दशमी, देव प्रबोधिनी एकादशी, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, गंगा दशहरा, बसन्त पंचमी, भड्डली नवमी, फुलेरा दूज और अक्षय तृतीया को बिना देखे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं ।
अक्षय तृतीया पर होगी सैकड़ों शादी
अक्षय तृतीया के दिन क्षेत्र में सैकड़ों शादियां होंगी। लोग शादी की खरीदारी करने परिवार समेत ब्लॉक मुख्यालयों से लेकर जिला मुख्यालय तक पहुंच रहे हैं। अक्षय तृतीया को लेकर सराफा, बर्तन और रेडीमेड कपड़ों की बिक्री में 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों से लोग बड़ी संख्या में खरीदारी करने पहुंचने लगे हैं। अक्षय तृतीया में ग्रामीण क्षेत्र के साथ-साथ शहर में भी बड़ी संख्या में शादियां होती हैं।
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