छुरा जनपद में सीईओ–उपाध्यक्ष आमने-सामने, अवैध वसूली के आरोपों से मचा हड़कंप, जांच की मांग

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– गरियाबंद जिले के छुरा जनपद पंचायत पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहाँ जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सतीश चंद्रवंशी और उपाध्यक्ष कुलेश्वर सोनवानी के बीच गंभीर आरोप–प्रत्यारोप का मामला सामने आया है। दोनों के बीच चल रहे इस विवाद ने एक बड़ा प्रशासनिक बवाल का रूप ले लिया है।
बता दे कि छुरा जनपद पंचायत उपाध्यक्ष कुलेश्वर सोनवानी ने सीईओ सतीश चंद्रवंशी पर फर्जी बिल तैयार कर बिना जनपद की स्वीकृति के शासकीय राशि आहरण करने का गंभीर आरोप लगाया है। उपाध्यक्ष का कहना है कि नियमों और प्रक्रियाओं को दरकिनार कर मनमाने ढंग से भुगतान किया गया, जिससे जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
वहीं जनपद क्षेत्र के कई सरपंचों ने भी सीईओ पर अवैध वसूली के आरोप लगाए हैं। सरपंचों का दावा है कि उनसे GST पंजीयन के नाम पर 3 हजार रुपये और 3 हजार रुपये बिना किसी वैध रसीद अथवा बिल के लिए गए। इस तरह कुल 6000 रुपए की वसूली का आरोप इनके द्वारा लगाया जा रहा है।

क्षेत्र के सरपंच देवकुमार दीवान, कोषाध्यक्ष सरपंच संघ छुरा, भोजराज नागेश, सरपंच कनसिंघी ने इस मामले में बताया कि उनसे GST पंजीयन के नाम पर 3 हजार रुपये और 3 हजार रुपये अन्य खर्चे के लिए प्रति पंचायत वसूले गए, वह भी बिना किसी वैध बिल या रसीद के। इन आरोपों से जुड़े कथित स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
सीईओ ने आरोपों को बताया निराधार

मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सीईओ सतीश चंद्रवंशी ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने बताया कि तीन हजार रुपये जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए 3000 रुपए सरपंच एवं सचिवों की सहमति से लिया गया है। वहीं अतिरिक्त तीन हजार रुपये लिए जाने के आरोप पर सीईओ ने कहा कि इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उनके विरुद्ध लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित हैं।
उपाध्यक्ष ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग

वहीं दूसरी ओर, उपाध्यक्ष कुलेश्वर सोनवानी ने पूरे प्रकरण को जनहित से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि यदि समय रहते इसकी निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इससे जनपद पंचायत की छवि और जनता का विश्वास दोनों प्रभावित होंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी अथवा वरिष्ठ अधिकारियों से जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जिले में बना चर्चा का केंद्र
फिलहाल यह विवाद गरियाबंद जिले के प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आमजन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक, सभी की नजरें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले में जांच के आदेश कब जारी होते हैं और सच्चाई सामने आने में कितना समय लगता है।
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