राजिम कुंभ मेला में वर्षों बाद निरई माता मंदिर के देवी-देवताओं का ऐतिहासिक आगमन, जयकारों से गूंजा मेला स्थल

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– इस वर्ष राजिम कुंभ मेला एक ऐतिहासिक और अलौकिक घटना का साक्षी बना, जब वर्षों बाद निरई माता की आज्ञा से निरई माता मंदिर से देवी-देवताओं का भव्य आगमन राजिम कुंभ मेला में हुआ। मांघ पूर्णिमा के पावन अवसर से एक दिन पूर्व ही निरई माता मंदिर के देवी-देवता राजिम मेला क्षेत्र पहुंचे, जिससे पूरे मेला परिसर में श्रद्धा, आस्था और उत्साह का वातावरण बन गया।

निराई माता की छोटी बहन ठकुराइन माता अपने पति ठाकुर देव (लम सेना बाबा) सहित देवी-देवताओं के साथ मांघ पूर्णिमा पर पवित्र स्नान हेतु राजिम पहुंचीं। इसके पश्चात नुकीली खीलोंवाली पालकी में सवार होकर, कांटेदार सेज में विराजमान हो देवी-देवताओं के साथ भगवान राजिम लोचन मंदिर, कुलेश्वर महादेव मंदिर, शीतला माता मंदिर के दर्शन किए और मेला भ्रमण किया।

जयकारों से गूंजा मेला स्थल

यह दृश्य देखकर हजारों श्रद्धालु दांतों तले उंगली दबाने को विवश हो गए और माता के जयकारों से मेला स्थल गूंज उठा। देवी ठकुराइन माता का रात्रि विश्राम राजिम कुंभ मेला में आयोजित राजिम भक्तिन माता भोग भंडारा स्थल में हुआ। निरई माता मंदिर ग्राम निरई, मोहेरा पंचायत, मगरलोड, विकासखंड व जिला धमतरी में स्थित है, जो धमतरी एवं गरियाबंद जिले का एक प्रसिद्ध देवी स्थल माना जाता है।

स्थानीय जनमान्यताओं के अनुसार, जब-जब राजिम कुंभ मेला में वन देवी-देवताओं का डोला आगमन होता है, तब मेला में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और मेला शांतिपूर्ण व निर्विघ्न रूप से संपन्न होता है। इस पावन डोला पालकी यात्रा में निरई माता मंदिर सेवा समिति के दो दर्जन से अधिक लोग शामिल रहे।

समिति के संरक्षक नेम लाल साहू, अध्यक्ष दिलीप ध्रुव, सचिव हेमंत ध्रुव सहित अनेक गणमान्य सदस्य एवं बैगा विशेष रूप से शामिल रहे। अनुभागीय अधिकारी विशाल महाराणा निर्देश से पुलिस प्रशासन की ओर से टीआई अमृतलाल साहू के द्वारा देवी-देवताओं की पालकी यात्रा हेतु पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। राजिम भक्तिन माता समिति के अध्यक्ष लाला साहू ने अपने निवास स्थान में निरई माता मंदिर से पधारे देवी-देवताओं का , दूध एवं जल से चरण पखार कर भव्य स्वागत किया।

इसके साथ ही कुंभ मेला में आयोजित राजिम भक्तिन माता भोग भंडारा की शुरुआत निराई माता की विशेष पूजा-अर्चना से की गई और मेला की सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। वर्षों बाद निरई माता मंदिर के देवी-देवताओं का राजिम कुंभ मेला में आगमन श्रद्धालुओं के लिए आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुपम पर्व बन गया।

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