लाइटिंग ठप, जिम्मेदार बेखबर : राजिम त्रिवेणी संगम पर करोड़ों का सस्पेंशन ब्रिज अंधेरे में, विभाग की लापरवाही, हादसे को खुला न्योता
नववर्ष पर श्रद्धालु मोबाइल फ्लैश की रोशनी में पुल पार करने को मजबूर

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पावन त्रिवेणी संगम पर बना करोड़ों रुपये की लागत वाला सस्पेंशन ब्रिज इन दिनों अंधेरे में डूबा है, और यह अंधेरा सिर्फ रोशनी का नहीं बल्कि सिस्टम की नाकामी का प्रतीक बन चुका है। नववर्ष पर जब हजारों श्रद्धालु आस्था के साथ संगम पहुंचे, तब सरकार की विकास परियोजना मोबाइल फ्लैश की रोशनी में चलती नजर आई। अब सीधा सवाल यह है – अगर कोई हादसा होता है, तो जिम्मेदार कौन होगा?
जल संसाधन विभाग द्वारा निर्मित इस ब्रिज की लाइटिंग व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने आंख मूंदे रखी है। करोड़ों खर्च होने के बावजूद बुनियादी सुरक्षा इंतजाम न होना इस बात की ओर इशारा करता है कि जानबूझकर जनता की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है।
राजिम कुंभ के पहले, नववर्ष, छेरछेरा पुन्नी, मकरसंक्रांति और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान इसी पुल से हजारों श्रद्धालु गुजरते हैं। अंधेरे में सस्पेंशन ब्रिज पर भीड़ का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व किसी भी घटना को अंजाम दे सकते है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर खामोश हैं। जनता पूछ रही है- लाइटिंग बंद होने के पीछे विभाग की क्या मजबूरी है? क्या रखरखाव के नाम पर बजट सिर्फ कागजों में खर्च हो गए? अगर सब कुछ ठीक है तो पुल अंधेरे में क्यों?
सरकार की छबि कर रहे धूमिल

त्रिवेणी संगम जैसे आस्था के केंद्र पर इस तरह की घोर लापरवाही अधिकारियों की संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल है। इसके साथ ही ये सरकार की छबि को भी जनता के सामने धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने मांग की है कि जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए, ब्रिज की लाइटिंग व्यवस्था तुरंत बहाल की जाए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
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