एक एजेंसी, हजारों जिम्मेदारियां! राजिम कुंभ कल्प में ‘इवेंट सिस्टम’ पर बड़ा सवाल, आखिर क्यों दोहराई जा रही वही चूक?

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– राजिम कुंभ कल्प मेला आगामी 1 फरवरी से 15 फरवरी तक आयोजित किया जाना है। मेला प्रारंभ होने में अब महज 6 दिन का समय शेष रह गया है, इसके बावजूद मेला मैदान में तैयारियां धीमी, अव्यवस्थित और बिना आवश्यक सुरक्षा मानकों के की जा रही हैं। निरीक्षण के दौरान मेला क्षेत्र में अव्यवस्थित निर्माण कार्य, मूलभूत सुविधाओं की कमी और जिम्मेदारों की उदासीनता देखकर मंत्री ने अधिकारियों व इवेंट एजेंसी के जिम्मेदारों को मौके पर ही फटकार लगाई है।
वैसे भी मजदूर सुरक्षा में चूक के बाद अब राजिम कुंभ कल्प मेला की व्यवस्थाओं को लेकर असली जड़ सामने आने लगी है। मंत्री राजेश अग्रवाल के औचक निरीक्षण ने सिर्फ मौके की अव्यवस्थाएं ही नहीं, बल्कि पिछले तीन वर्षों से चल रहे इवेंट आधारित टेंडर सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों की मानें तो मेला प्रबंधन में बार-बार सामने आ रही लापरवाहियों के पीछे यही इवेंट सिस्टम सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है।
समयाभाव के कारण अपनाई गई थी इवेंट सिस्टम
राजिम कुंभ कल्प मेला छत्तीसगढ़ शासन का वृहद धार्मिक आयोजन है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इतनी बड़ी भीड़, विशाल क्षेत्र और बहुआयामी व्यवस्थाओं के लिए पिछले तीन वर्षों से लगभग सभी प्रमुख कार्य निर्माण, पंडाल, मंच, बिजली, बैरिकेडिंग, सजावट से लेकर कई अन्य व्यवस्थाएं इवेंट एजेंसी को सौंप दी जाती हैं। बता दें वर्ष 2024 में सरकार बदलने के बाद तैयारियों के लिए समयाभाव का तर्क देकर यह व्यवस्था अपनाई गई थी, लेकिन अब जब तैयारी के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध रहता है, तब भी अलग-अलग टेंडर जारी नहीं किए जा रहे।
तय नहीं की गई जिम्मेदारी
सूत्र बताते हैं कि तीन वर्षों से इवेंट एजेंसी का नाम अलग रहता है, लेकिन काम की जिम्मेदारी लगातार कुछ व्यक्तियों के माध्यम से संचालित कराया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि हर वर्ष इवेंट एजेंसी के कार्यों को लेकर लापरवाही, देरी और गुणवत्ता को लेकर कई शिकायतें सामने आती रही हैं, इसके बावजूद न तो सिस्टम बदला गया और न ही जिम्मेदारी तय की गई।
इवेंट एजेंसी पर बढ़ता है कार्य का दबाव

बता दें कि राजिम कुंभ का आयोजन पिछले 20 वर्षों से हो रहा है। पहले की व्यवस्था में विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग टेंडर निकालकर वेंडर नियुक्त करते थे। इससे काम का बंटवारा स्पष्ट रहता था, अधिकारियों की जिम्मेदारी तय रहती थी और समय पर कार्य पूरा हो जाता था। अब पूरे मेला प्रबंधन का बोझ एक ही इवेंट एजेंसी पर डाल दिए जाने से न सिर्फ काम का दबाव अत्यधिक बढ़ गया है, बल्कि निगरानी और जवाबदेही भी कमजोर हो गई है। नतीजा अधूरा निर्माण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी, मजदूरों के लिए सुरक्षा उपकरणों की कमी और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में अव्यवस्था बनती जा रही है।
बार बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद हालात में सुधार न होना इस बात का संकेत है कि इवेंट सिस्टम सिर्फ कागजों में सुचारु है, जमीनी स्तर पर पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। मंत्री के निरीक्षण के दौरान जो खामियां सामने आईं, वो कोई एक दिन की लापरवाही नहीं, बल्कि पिछले 2 वर्षों से चली आ रही अव्यवस्था का नतीजा माना जा रहा हैं।
अव्यवस्था पर मंत्री के सख्त तेवर
निरीक्षण के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल ने कड़े शब्दों में कहा कि राजिम कुंभ कल्प राज्य की आस्था, संस्कृति और शासन की साख से जुड़ा आयोजन है। यहां किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके सख्त तेवरों के बाद अब यह सवाल और तेज हो गया है कि क्या शासन इस एकाधिकार वाले इवेंट सिस्टम की समीक्षा करेगा? क्या भविष्य में फिर से अलग-अलग टेंडर जारी कर जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया जाएगा?
टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल

मेला प्रशासन और इवेंट एजेंसी पर बढ़ते दबाव के बीच अब यह मुद्दा सिर्फ व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हुए है। अगर समय रहते सिस्टम में सुधार नहीं हुआ, तो हर साल राजिम कुंभ कल्प में सामने आने वाली लापरवाहियां शासन और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती हैं।
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