छत्तीसगढ़ में व्यावसायिक प्रशिक्षकों का फूटा गुस्सा: विभाग पर लगाए आरोप, आंदोलन की दी चेतावनी

4 महीने से वेतन और एक साल से इंक्रीमेंट अटका

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– छत्तीसगढ़ के शासकीय विद्यालयों में कार्यरत हजारों व्यावसायिक प्रशिक्षकों (Vocational Trainers) के सामने वर्तमान में गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ नवीन व्यावसायिक प्रशिक्षक कल्याण संघ ने आरोप लगाया है कि समग्र शिक्षा विभाग ने महज एक ‘निराधार’ और ‘अप्रमाणित’ शिकायत को आधार बनाकर सैकड़ों प्रशिक्षकों का मानदेय (सैलरी) रोक दिया है, जबकि ये प्रशिक्षक लगातार अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

विभागीय आदेशों की अनदेखी का आरोप

संघ के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश कुमार ने बताया कि विभाग द्वारा 30 सितंबर 2025 और 13 फरवरी 2026 को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि कार्यभार ग्रहण कर चुके प्रशिक्षकों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इसके बावजूद, भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी एक सामान्य शिकायत का हवाला देकर भुगतान रोकना प्रशासनिक अन्याय है। स्थिति यह है कि नए प्रशिक्षकों का पिछले 4 माह से मानदेय लंबित है, वहीं पुराने प्रशिक्षकों का भी लगभग 1 वर्ष से वार्षिक इंक्रीमेंट विभाग द्वारा रोका गया है, जिससे प्रशिक्षकों को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है।

आउटसोर्सिंग कंपनियों और विभाग की ‘मिलीभगत’ पर सवाल

संघ ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि विभाग दोषी कंपनियों को अनुचित संरक्षण प्रदान कर रहा है। प्रदेश अध्यक्ष ने तीखा प्रहार करते हुए पूछा कि “यदि ये आउटसोर्सिंग कंपनियां अपने कर्मचारियों को 4 महीने का वेतन देने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें किस आधार पर टेंडर और वर्क ऑर्डर दिया गया?”। संघ ने मांग की है कि अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए और इस कथित ‘गठबंधन’ की उच्च स्तरीय जांच हो।

एरियर के साथ भुगतान की मांग

प्रदेश सचिव अभिषेक ताम्रकार के अनुसार, प्रशिक्षक पूरी निष्ठा के साथ विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा दे रहे हैं, लेकिन महीनों तक वेतन रोकना उनके साथ घोर अन्याय है। संघ की मुख्य मांग है कि नए प्रशिक्षकों का 4 माह का लंबित मानदेय तत्काल जारी किया जाए और सभी प्रशिक्षकों के एक वर्ष के लंबित वार्षिक इंक्रीमेंट का भुगतान एरियर (Arrears) सहित शीघ्र किया जाए।

राजधानी में बड़े आंदोलन की तैयारी

संघ ने विभाग को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे प्रशिक्षकों के धैर्य की परीक्षा न लें। यदि जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया और लंबित भुगतान जारी नहीं किए गए, तो प्रदेश भर के व्यावसायिक प्रशिक्षक राजधानी रायपुर में एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। संघ ने साफ किया है कि इस आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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