महिला जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों को प्रतिनिधि बनाने पर लगी रोक, छत्तीसगढ़ सरकार ने नियम में किया संशोधन

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के परिजनों के प्रतिनिधि के रूप में नामनिर्देशन पर रोक लगा दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम और छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम के तहत प्रतिनिधि नामांकन से संबंधित नियमों में संशोधन करते हुए अधिसूचना जारी की है।

राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब किसी भी नगरीय निकाय में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन अथवा किसी अन्य निकट पारिवारिक सदस्य या नातेदार को उनके प्रतिनिधि अथवा समन्वयक के रूप में नामनिर्देशित या नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।

यह संशोधन छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 433 सहपठित धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (ड.) तथा छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 355 सहपठित धारा 19 की उपधारा (1) के खंड (ड.) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया गया है।

महिला प्रतिनिधियों के अधिकार को मिलेगी मजबूती

सरकार के इस फैसले को नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की स्वतंत्र भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए प्रावधान के बाद महिला पार्षदों या अन्य निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके परिजनों द्वारा प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने की व्यवस्था पर प्रभावी रोक लगेगी।

अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के निकट पारिवारिक सदस्य या नातेदार को उनके प्रतिनिधि अथवा समन्वयक के रूप में नामनिर्देशित या नियुक्त नहीं किया जाएगा।

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