विश्व आदिवासी दिवस के मंच पर साथ दिखे संजय सिंह और अमित बघेल, आदिवासी अधिकारों से 2028 की सियासत तक गरमाया माहौल
एक तरफ आम आदमी पार्टी का हमला, दूसरी तरफ जोहार क्रांति सेना के अमित बघेल का छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान का मुद्दा; पेसा, ग्रामसभा, जल-जंगल-जमीन और युवाओं के भविष्य पर उठी आवाज

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) किशन सिन्हा:- विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर गरियाबंद में आयोजित कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष अमित बघेल एक ही मंच पर नजर आए। मंच से दोनों नेताओं ने अपने-अपने अंदाज में आदिवासी समाज के अधिकार, जल-जंगल-जमीन, ग्रामसभा, पेसा कानून, युवाओं के रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।
संजय सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आदिवासी समाज ने देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन आज भी उसे अपने अधिकारों और उचित प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने पेसा कानून, ग्रामसभा के अधिकार, जंगलों की कटाई और आदिवासी हितों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक स्तर पर मजबूत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

छात्रों पर कार्रवाई और पूंजीपतियों को लेकर सरकार पर हमला
संजय सिंह ने युवाओं और छात्रों के आंदोलनों का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों के साथ सख्ती की जा रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि सरकार युवाओं की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने रोजगार, बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य को युवाओं की प्राथमिक जरूरत बताते हुए सरकार पर जनता की समस्याओं से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, रोजगार और आदिवासी अधिकारों को लेकर भी सरकार को घेरा। संजय सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत है और चुनाव के माध्यम से जनता सरकारों के कामकाज का जवाब दे सकती है। उन्होंने 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर ऐसी सरकार चुनने की अपील की, जो आम जनता, आदिवासियों, युवाओं और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए काम करे।
अमित बघेल बोले—“छत्तीसगढ़िया मन खुद नीति बनाही अउ खुद राज करही”
इसी मंच से जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष अमित बघेल ने मूलनिवासी छत्तीसगढ़िया समाज की पहचान, संस्कृति, भाषा और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी। अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद द्वारा आयोजित “मूलनिवासी जुराव” कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़िया मन खुद नीति बनाही अउ खुद राज करही, तब पूरा होही पुरखा मनके सपना।”
अमित बघेल ने वीर नारायण सिंह और वीर गुंडाधुर के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी और यहां के मूलनिवासी समाज के इतिहास, संस्कृति और पहचान को उचित सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने हसदेव अरण्य में जंगल कटाई के विरोध में अपने आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि मूलनिवासी छत्तीसगढ़िया भाई-बहनों के हक और अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे।

वोट की ताकत समझने की अपील
अमित बघेल ने चुनावी राजनीति में मतदाताओं को मिलने वाले कथित प्रलोभनों पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने समाज से अपील की कि वे अपने वोट की ताकत को समझें और किसी भी तरह के छोटे प्रलोभन के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, जल-जंगल-जमीन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखकर मतदान करें।
विश्व आदिवासी दिवस के इस मंच पर एक ओर संजय सिंह ने आदिवासी अधिकारों, युवाओं, रोजगार और सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए, वहीं अमित बघेल ने छत्तीसगढ़िया पहचान, मूलनिवासी अधिकार और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक नेतृत्व की जरूरत को प्रमुखता से रखा। दोनों नेताओं के बयानों के बीच 2028 के विधानसभा चुनाव की सियासी तस्वीर और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में अधिकारों की राजनीति का मुद्दा भी चर्चा में रहा।











