ऋषि पंचमी पर निकली सांपों की अनोखी शोभायात्रा, ढोल-नगाड़ों की थाप पर नागदेवों की हुई पूजा, VIDEO

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) राजिम :– गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र में ऋषि पंचमी का पर्व इस बार भी वर्षों पुरानी अनोखी परंपरा के साथ मनाया गया। यहां ऋषि पंचमी के अवसर पर सांपों की पूजा-अर्चना कर उनकी शोभायात्रा निकाली जाती है। मंगलवार को गांव में 9 सांपों की विशेष शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ आसपास के गांवों से पहुंचे लोगों ने भी हिस्सा लिया। ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक गीत-संगीत और धार्मिक माहौल के बीच निकली यह शोभायात्रा पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बनी रही।

राजिम क्षेत्र के ग्राम देवरी में वर्षों से चली आ रही यह परंपरा अब गांव की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है। ऋषि पंचमी के दिन होने वाले इस आयोजन में नागदेवों की पूजा-अर्चना के बाद उन्हें गांव की गलियों में भ्रमण कराया जाता है और धार्मिक रस्में पूरी करने के बाद सर्पों को सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की परंपरा है।

अटल चौक से शुरू हुई शोभायात्रा

ऋषि पंचमी के अवसर पर सोमवार को ग्राम देवरी के अटल चौक से सांपों की शोभायात्रा शुरू हुई। शोभायात्रा गांव की विभिन्न गलियों से होते हुए शीतला माता प्रांगण पहुंची। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की थाप पर सांवरा समाज के लोग और ग्रामीण पारंपरिक तरीके से शोभायात्रा में शामिल हुए।

शीतला माता प्रांगण में धार्मिक परंपरा के अनुसार पाठ-पिठौलिया और ठंडा करने की रस्म पूरी की गई। इसके बाद शोभायात्रा वापस लौटने की प्रक्रिया हुई। आयोजन को देखने और इसमें शामिल होने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग देवरी पहुंचे।

विधि-विधान से नागदेवों की पूजा-अर्चना

आयोजन के दौरान स्थानीय पुजारियों और बुजुर्गों की मौजूदगी में सर्पों की पूजा-अर्चना की गई। परंपरा के अनुसार नागदेवों को दूध, हल्दी, कुमकुम और फूल अर्पित किए गए। ग्रामीणों ने गांव की खुशहाली, फसलों की सुरक्षा और परिवारों की सुख-समृद्धि की कामना की।

पूजा-अर्चना के बाद सर्पों को सुरक्षित तरीके से शोभायात्रा में शामिल किया गया। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पूजा कर नागदेवों का स्वागत किया।

सांवरा गुरु पाठशाला में मिलता है सर्प पकड़ने का प्रशिक्षण

ग्राम देवरी स्थित गुरु सांवरा पाठशाला इस परंपरा का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। बताया गया कि यहां वर्षभर सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार और सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है।

आयोजकों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में घरों और खेतों में निकलने वाले सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उन्हें नुकसान पहुंचाए बिना संरक्षित करने की जानकारी युवाओं को दी जाती है। ऋषि पंचमी के अवसर पर इसी परंपरा के तहत सर्पों की पूजा और शोभायात्रा का आयोजन किया जाता है।

ऋषि पंचमी पर होता है दीक्षांत समारोह

गुरु सांवरा पाठशाला से जुड़ी इस परंपरा में ऋषि पंचमी का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी अवसर पर पाठशाला से प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों के लिए दीक्षांत समारोह भी आयोजित किया जाता है। सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार की जानकारी को आगे बढ़ाने की परंपरा यहां लंबे समय से चली आ रही है।

पूजा के बाद सर्पों को जंगल में छोड़ने की परंपरा

शोभायात्रा और पूजा-अर्चना के बाद सर्पों को सुरक्षित रूप से उनके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सांपों के प्रति संवेदनशीलता और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है।

ग्रामीणों के मुताबिक, वर्षों से ऋषि पंचमी के दिन यह आयोजन होता आ रहा है और परंपरा के दौरान सर्पों को सुरक्षित रखने का विशेष ध्यान दिया जाता है।

आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश

ग्राम देवरी में ऋषि पंचमी पर होने वाला यह आयोजन क्षेत्र के लिए खास पहचान बन चुका है। एक ओर जहां ग्रामीण नागदेवों की पूजा कर अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त करते हैं, वहीं दूसरी ओर सांपों को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की परंपरा वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देती है। हर साल इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग देवरी पहुंचते हैं। 

VIDEO

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