दसकुंड महोत्सव में बनी 100 किलो की विशाल अंगाकर रोटी, वन देवी को भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं को बांटा प्रसाद

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) छुरा :– छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, धार्मिक आस्था और पारंपरिक खान-पान की अनूठी झलक दसकुंड महोत्सव 2026 एवं वन देवी यज्ञ में देखने को मिली। नवरात्रि की पंचमी पर जामवंत दादा की तपस्थली रहस्यमय गुफा के समीप अग्निकुंड के पास लगभग 100 किलो की विशाल अंगाकर पान रोटी तैयार की गई। विधि-विधान से वन देवी को भोग अर्पित करने के बाद रोटी को श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया। इस अनूठी प्रस्तुति ने महोत्सव में विशेष आकर्षण पैदा किया।
गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत केडीआमा (रमनपुर) स्थित दसकुंड क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खान-पान संस्कृति, ग्रामीण जीवनशैली और धार्मिक परंपराओं को नई पहचान दिलाना है। विशाल आकार की अंगाकर पान रोटी के माध्यम से स्थानीय व्यंजन परंपरा को सम्मान देने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया गया।
आस्था और परंपरा का अनूठा संगम
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में अंगाकर रोटी का विशेष महत्व रहा है। स्थानीय अनाज से तैयार होने वाला यह पारंपरिक व्यंजन यहां की खान-पान संस्कृति और ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा है। त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर पारंपरिक पकवान बनाने की परंपरा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में जीवंत है।
इसी परंपरा को व्यापक पहचान दिलाने के उद्देश्य से दसकुंड महोत्सव की पंचमी पर लगभग 100 किलो की विशाल अंगाकर पान रोटी तैयार की गई। इसे वन देवी को अर्पित कर प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं तक पहुंचाया गया। आयोजन में धार्मिक श्रद्धा के साथ सामूहिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान भी दिखाई दिया।
जामवंत दादा की तपस्थली और अग्निकुंड को लेकर श्रद्धालुओं में आस्था
दसकुंड क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जंगलों, पहाड़ियों, जलस्रोतों और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। यहां स्थित जामवंत दादा की तपस्थली रहस्यमय गुफा तथा समीपस्थ अग्निकुंड को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। क्षेत्र से जुड़ी जनश्रुतियां और लोकमान्यताएं यहां की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।आयोजकों का प्रयास है कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाया जाए।
राजकुमार यादव की परिकल्पना से साकार हो रहा महोत्सव
दसकुंड महोत्सव की परिकल्पना करने वाले कार्यक्रम संयोजक राजकुमार यादव, निवासी ग्राम लोहरसी (राजिम), ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की लोकसंस्कृति, धार्मिक आस्था, पारंपरिक खान-पान और प्राकृतिक धरोहर को जन-जन तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान केवल लोकगीतों और लोकनृत्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक व्यंजन, रीति-रिवाज, जनश्रुतियां और धार्मिक स्थल भी हमारी विरासत के महत्वपूर्ण अंग हैं। इन परंपराओं का संरक्षण कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
राजकुमार यादव के अनुसार, दसकुंड महोत्सव के माध्यम से क्षेत्र की विशेषताओं को सामने लाने तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। विशाल अंगाकर पान रोटी की प्रस्तुति भी इसी पहल का हिस्सा है। उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाले समिति के सदस्यों, ग्रामीणों, सहयोगियों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
दसकुंड विकास समिति और सहयोगियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
दसकुंड महोत्सव 2026 एवं वन देवी यज्ञ के आयोजन में दसकुंड विकास समिति के पदाधिकारियों और सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति के अध्यक्ष दीनदयाल विश्वकर्मा, उपाध्यक्ष रामेश्वर ध्रुव, सचिव दुर्गेश ध्रुव और कोषाध्यक्ष भानु निषाद आयोजन से जुड़े कार्यों में सहभागिता निभा रहे हैं।
समिति के संरक्षकों में राम जी ध्रुव, दिलीप कुमार ध्रुव शामिल हैं। वहीं सहयोगियों में पन्नालाल साहू, पहलाद गंधर्व (राजिम), डाहरूराम साहू (लफेंदी), गौकरण मानिकपुरी (फुलझर-घटारानी) तथा नूतन साहू, पूर्व पंचायत इंस्पेक्टर (पांडुका) का योगदान उल्लेखनीय रहा।
सांस्कृतिक पहचान के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल
दसकुंड क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताओं और धार्मिक मान्यताओं को देखते हुए यहां धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाएं हैं। इसके लिए क्षेत्र की प्रामाणिक जानकारी का संकलन, स्थानीय जनश्रुतियों का दस्तावेजीकरण, प्राकृतिक वातावरण का संरक्षण और आगंतुकों के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास महत्वपूर्ण होगा।
दसकुंड महोत्सव जैसे आयोजन स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को मंच प्रदान करते हैं। नवरात्रि की पंचमी पर तैयार की गई लगभग 100 किलोग्राम की विशाल अंगाकर पान रोटी इसी प्रयास की यादगार प्रस्तुति बनी। वन देवी को भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण के इस आयोजन ने धार्मिक आस्था, पारंपरिक खान-पान और सामूहिक सहयोग की भावना को एक सूत्र में पिरोया।
छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/KHz20xYe8ouK4y2vqJnOXl











