आवासीय छात्रावास में 3 आदिवासी छात्राएं गर्भवती, प्रशासन में मचा हड़ंकप, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– आवासीय छात्रावास से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां रहने वाली तीन आदिवासी छात्राएं गर्भवती पाई गई हैं। मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और पूरे शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला बीजापुर जिले के गंगालूर स्थित पोर्टा केबिन का है।
जानकारी के अनुसार तीनों छात्राएं हायर सेकेंडरी कक्षाओं में पढ़ाई कर रही थीं। इनमें से दो छात्राएं 12वीं और एक छात्रा 11वीं कक्षा की है। छात्राएं आरएमएसए के तहत संचालित पोर्टा केबिन आवासीय विद्यालय और सामने स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल से जुड़ी बताई जा रही हैं, जबकि तीनों एक ही छात्रावास परिसर में रहती थीं।
पांच महीने पहले हटाया गया छात्रावास से
मिली जानकारी के मुताबिक छात्राओं के गर्भवती होने की जानकारी सामने आने के बाद उन्हें करीब पांच महीने पहले ही चुपचाप छात्रावास से हटा दिया गया था। इसके बाद से वे नियमित रूप से स्कूल नहीं आ रही थीं। हालांकि 12वीं की दो छात्राओं ने हाल ही में अपनी अंतिम परीक्षा दी है।
अधीक्षिका बोलीं – “मेरे कार्यकाल का मामला नहीं”
मामले के सामने आने के बाद छात्रावास की अधीक्षिका मीरा तिग्गा ने दावा किया कि यह घटना उनके कार्यकाल की नहीं है और छात्राएं लंबे समय से छात्रावास से अनुपस्थित हैं। उनके इस बयान के बाद सवाल और गंभीर हो गए हैं कि आखिर छात्रावास में रह रही छात्राओं की इतनी बड़ी स्थिति की जानकारी प्रबंधन को कैसे नहीं हुई।
प्रशासन और शिक्षा विभाग पर उठे सवाल
जिले में दो जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), चार खंड स्रोत समन्वयक (BRC), सहायक खंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) और अन्य अधिकारी पदस्थ होने के बावजूद पांच महीने तक इस मामले की जानकारी सामने नहीं आना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है। लोगों का आरोप है कि आश्रम, छात्रावास और पोर्टा केबिन संस्थाओं का नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा और विभागीय दौरे अक्सर केवल औपचारिकता तक सीमित रह जाते हैं।
राजनीति भी गरमाई
इस मामले को लेकर सियासत भी गरमा गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने भी प्रदेश सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश में आदिवासी छात्राएं भी सुरक्षित नहीं हैं।
जांच में जुटा प्रशासन
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और टीम ने मौके पर पहुंचकर छात्राओं के परिजनों से जानकारी जुटा रही है। बीजापुर के कलेक्टर संबित मिश्रा ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
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