गणेश चतुर्थी के दिन बना धार्मिक और खगोलीय संयोग: आसमान में दिखा अद्भुत नजारा, चंद्रमा के पास चमका ‘सांझ का तारा’, नजारे ने खींचा लोगों का ध्यान

लोगों ने छतों और सड़कों से कैमरे में कैद किया खूबसूरत खगोलीय संयोग

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) छुरा :– गरियाबंद जिले साहित कई राज्यों में गणेश चतुर्थी की शाम सोमवार 14 सितंबर को आसमान में दिखाई दिए एक खूबसूरत खगोलीय नजारे ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में पतले अर्धचंद्रमा के बेहद करीब एक चमकीला पिंड दिखाई दिया। पहली नजर में यह किसी चमकते तारे जैसा नजर आया, लेकिन वास्तव में यह शुक्र ग्रह था। चंद्रमा और शुक्र की यह नजदीकी जोड़ी आसमान में बेहद आकर्षक दिखाई दे रही थी।

शाम करीब 7 बजे के आसपास जैसे ही लोगों की नजर चंद्रमा के पास चमक रहे शुक्र ग्रह पर पड़ी, बड़ी संख्या में लोग इस नजारे को देखने के लिए घरों की छतों और आंगन में पहुंच गए। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से चंद्रमा और शुक्र की तस्वीरें और वीडियो भी बनाए। देखते ही देखते यह खगोलीय दृश्य स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

चांद के पास नजर आया ‘सांझ का तारा’

खगोल विज्ञान के अनुसार शुक्र ग्रह पृथ्वी के आकाश में सबसे चमकीले ग्रहों में से एक है। सूर्यास्त के बाद दिखाई देने पर इसे आम बोलचाल में ‘सांझ का तारा’ या Evening Star कहा जाता है। 14 सितंबर की शाम पतली चंद्रमा की कोर और चमकीले शुक्र के बीच करीब पांच डिग्री की दूरी थी, जिसके कारण दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई दे रहे थे।

खगोल प्रेमियों के लिए यह खास दृश्य इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि चंद्रमा और शुक्र की यह नजदीकी जोड़ी बिना किसी विशेष उपकरण के भी साफ आसमान में देखी जा सकती थी। दोनों खगोलीय पिंड सूर्यास्त के कुछ देर बाद पश्चिमी दिशा में दिखाई दिए और क्षितिज के करीब होने के कारण ज्यादा देर तक नजर नहीं आए।

14 सितंबर को हुआ चंद्रमा-शुक्र का खास संयोग

अलग-अलग राज्यों में अलग दिखा नजारा

खगोलीय रिपोर्टों के मुताबिक 14 सितंबर को चंद्रमा और शुक्र का बेहद करीबी संयोग बना। इसी दिन कुछ क्षेत्रों में चंद्रमा के सामने से शुक्र के गुजरने यानी Lunar Occultation की घटना भी हुई, हालांकि इसका पूरा घटनाक्रम हर स्थान से एक समान दिखाई नहीं देता। दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में शाम के समय चंद्रमा और शुक्र की करीबी जोड़ी देखने को मिली।

गणेश चतुर्थी के दिन बना धार्मिक और खगोलीय संयोग

इस खगोलीय नजारे की खासियत यह भी रही कि यह दृश्य गणेश चतुर्थी के अवसर पर दिखाई दिया। 14 सितंबर 2026 को देश के विभिन्न हिस्सों में गणेश चतुर्थी के साथ हरितालिका तीज का पर्व भी मनाया गया। ऐसे में धार्मिक उत्सव के बीच आसमान में चंद्रमा और शुक्र की चमकती जोड़ी ने शाम को और खास बना दिया।

चंद्र दर्शन को लेकर भी रही चर्चा

गणेश चतुर्थी के अवसर पर चंद्र दर्शन को लेकर धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। इसी वजह से चंद्रमा और उसके पास चमकते शुक्र को लेकर लोगों के बीच सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं भी होती रहीं। हालांकि खगोल विज्ञान की दृष्टि से यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना थी, जिसमें सूर्य के प्रकाश से चमकता शुक्र ग्रह और चंद्रमा एक ही क्षेत्र में बेहद करीब नजर आए।

सोशल मीडिया पर छा गया आसमान का नजारा

चंद्रमा के पास चमकते शुक्र का यह दृश्य लोगों के लिए इतना आकर्षक रहा कि कई लोगों ने इसे अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर सोशल मीडिया पर साझा किया। तस्वीरों में पतली चंद्रमा की कोर के पास चमकता हुआ शुक्र ग्रह बेहद खूबसूरत दिखाई दिया। गणेश चतुर्थी की रोशनी और उत्सव के बीच आसमान का यह नजारा लोगों के लिए शाम का एक अतिरिक्त आकर्षण बन गया।

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