15 साल से 12वीं तक स्कूल, फिर भी अपना भवन नहीं; ग्रामीणों ने की तालाबंदी

मुख्यमंत्री से लेकर विधानसभा अध्यक्ष तक लगा चुके गुहार, तीन पंचायतों के करीब 300 बच्चे टीन शेड और जर्जर भवनों में पढ़ने को मजबूर

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज)किशन सिन्हा :–  छुरा ब्लाक के रुवाड़ ग्राम पंचायत में स्कूल भवन की मांग को लेकर मंगलवार सुबह ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया। लंबे समय से स्कूल भवन की मांग पूरी नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने स्कूल में तालाबंदी कर दी। सूचना मिलने पर पीपरछेड़ी थाना का पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के सामने मांग रखने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है, जिसके चलते अब उन्हें तालाबंदी का रास्ता अपनाना पड़ा।

ग्रामीणों के मुताबिक रुवाड़ में स्कूल संचालन का इतिहास करीब 1956 से जुड़ा हुआ है, लेकिन करीब सात दशक बाद भी यहां की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह व्यवस्थित भवन में नहीं पहुंच सकी है। करीब 15 वर्षों से गांव में 12वीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन हाई स्कूल स्तर के लिए आज तक अपना समुचित भवन नहीं बन सका है। वर्तमान में प्राथमिक से लेकर हाई स्कूल तक की कक्षाएं अलग-अलग भवनों और टीन शेड के सहारे संचालित की जा रही हैं।

हालांकि गांव में मिडिल स्कूल का भवन पहले बनाया जा चुका है, लेकिन वर्तमान में उसकी हालत भी चिंता का विषय बनी हुई है। भवन कई स्थानों से जर्जर हो चुका है और बारिश के मौसम में छत से पानी टपकने की समस्या सामने आती है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस भवन में बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, वहां बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के कारण कक्षाएं प्रभावित होती हैं। ऐसे में भवन होने के बावजूद उसकी मौजूदा स्थिति शिक्षा व्यवस्था की दूसरी समस्या बन गई है।

15 वर्षों से स्कूल भवन की मांग

बताया जा रहा है कि स्कूल में आसपास की करीब तीन पंचायतों से लगभग 300 बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। इनमें बड़ी संख्या अति पिछड़ी जनजाति समुदाय के बच्चों की है। सीमित भवन और उपलब्ध संसाधनों के कारण स्कूल संचालन की स्थिति ऐसी है कि सुबह 7 बजे से 11 बजे तक प्राथमिक शाला परिसर में मिडिल स्कूल की कक्षाएं संचालित होती हैं, जबकि इसके बाद सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक प्राथमिक और हाई स्कूल की कक्षाएं लगाई जाती हैं। इसके अलावा प्राथमिक शाला परिसर, टीन शेड और गांव के कुछ अन्य भवनों को मिलाकर किसी तरह स्कूल का संचालन किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब 15 वर्षों से स्कूल भवन की मांग को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री से मुलाकात के साथ कई प्रभारी मंत्रियों, विधायकों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के सामने समस्या रखी जा चुकी है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन शिकायत के बाद भी अब तक ऐसा कोई परिणाम सामने नहीं आया, जिससे ग्रामीणों को स्थायी समाधान की उम्मीद दिखाई दे।

हाल ही में ग्रामीणों ने विधानसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात कर स्कूल भवन की मांग रखी थी। इसके बावजूद जब स्कूल की स्थिति में बदलाव नहीं आया तो ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता गया। उनका कहना है कि सत्ता और सरकार किसी की भी रही हो, गांव के बच्चों की शिक्षा से जुड़े इस बुनियादी मुद्दे पर अब तक अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।

बच्चों की सुरक्षा पर सवाल

ग्रामीणों की पहल और सहयोग से स्कूल फिलहाल उपलब्ध भवनों और टीन शेड के सहारे किसी तरह चल रहा है, लेकिन सवाल यह है कि 12वीं तक की पढ़ाई कराने वाला स्कूल आखिर कब तक इसी तरह अलग-अलग जगहों और सीमित सुविधाओं के सहारे संचालित होता रहेगा? एक तरफ हाई स्कूल के लिए समुचित भवन का अभाव है, तो दूसरी तरफ मिडिल स्कूल का पुराना भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने की समस्या बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई दोनों पर सवाल खड़े करती है।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान करते हुए स्कूल के लिए पर्याप्त और सुरक्षित भवन उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्कूल भवन निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई चाहिए। मंगलवार की तालाबंदी को उन्होंने अपनी लंबे समय से लंबित मांग की ओर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का कदम बताया है।

छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

https://chat.whatsapp.com/KHz20xYe8ouK4y2vqJnOXl

यह खबर भी जरुर पढ़े

सफलता की कहानी: गेंदा फूल की खेती से छुरा के किसान हेमचंद साहू की बदली तस्वीर

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button