शिक्षा विभाग में अभद्रता का आरोप: शिक्षक से फोन पर कहा—‘तेरा बाप’, दिवंगत पिता पर टिप्पणी से भड़का आक्रोश
कॉल रिकॉर्डिंग सुरक्षित होने का दावा, निलंबन की मांग

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– गरियाबंद शिक्षा विभाग के एक कार्यालय में पदस्थ लिपिक पर अपने ही विभाग के शिक्षक के साथ फोन पर अभद्र व्यवहार करने और उनके दिवंगत पिता को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का गंभीर आरोप लगा है।
मामला विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय छुरा का है, जहां पदस्थ लिपिक दिनेश साहू पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पक्तियां में पदस्थ शिक्षक विकास मिश्रा ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद शिक्षक ने जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद को लिखित शिकायत सौंपकर संबंधित लिपिक के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई और निलंबन की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, 4 नवंबर 2026 को लिपिक दिनेश साहू ने अपने व्यक्तिगत मोबाइल नंबर से शिक्षक विकास मिश्रा को फोन किया था। बातचीत चिकित्सा अवकाश और वेतन से संबंधित विषय को लेकर हो रही थी। इसी दौरान शिक्षक ने फोन किए जाने के संबंध में सामान्य सवाल पूछा, जिस पर कथित तौर पर लिपिक का व्यवहार अचानक उग्र हो गया।
शिक्षक का आरोप है कि बातचीत के दौरान लिपिक ने पहले कहा कि, “मैं सब जानता हूं, तुम्हारे आका कौन हैं।” इस पर जब शिक्षक ने उनसे पूछा कि उनके आका कौन हैं, तो कथित रूप से जवाब दिया गया—”तेरा बाप।”
बताया जा रहा है कि बातचीत में इस्तेमाल किए गए इन शब्दों ने शिक्षक को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया। खास बात यह है कि शिक्षक के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। ऐसे में उनके दिवंगत पिता को लेकर की गई कथित टिप्पणी को शिक्षक ने न केवल अपना व्यक्तिगत अपमान, बल्कि परिवार की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य बताया है।
कॉल रिकॉर्डिंग होने का दावा, DEO से लगाई न्याय की गुहार
शिक्षक विकास मिश्रा का दावा है कि लिपिक के साथ हुई पूरी बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग उनके पास सुरक्षित है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर जांच के दौरान साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद को लिखित शिकायत देकर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही संबंधित लिपिक से जवाब-तलब कर आरोपों की पुष्टि होने पर निलंबन सहित कठोर विभागीय कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई है।
सरकारी कार्यालय में पद की मर्यादा से बड़ा नहीं कोई अधिकार
यह मामला केवल दो कर्मचारियों के बीच हुई कथित फोन बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि शासकीय कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों के आपसी व्यवहार, अनुशासन और कार्यस्थल की गरिमा से भी जुड़ा है। वेतन, चिकित्सा अवकाश अथवा विभागीय प्रक्रिया को लेकर किसी कर्मचारी के बीच असहमति हो सकती है, लेकिन क्या ऐसी असहमति किसी को दूसरे कर्मचारी के आत्मसम्मान और परिवार की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा इस्तेमाल करने का अधिकार देती है?
शासकीय सेवा में पद और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार की मर्यादा तथा जवाबदेही भी जुड़ी होती है। ऐसे में शिक्षक द्वारा की गई शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों का पक्ष सुनना जरूरी है।
अब विभागीय कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि इस प्रकार की अमर्यादित भाषा का प्रयोग बेहद निंदनीय है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले में शिक्षक की शिकायत और उनके द्वारा कॉल रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने के दावे के बाद जिला शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
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