400 साल पुराना ऐतिहासिक बरगद धराशायी, बाल-बाल बची कई जिंदगियां; छुरा नगर की पहचान पलभर में बिखरी

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) किशन सिन्हा:– छुरा नगर के हृदय स्थल ठाकुरदीया चौक में लगभग चार सौ वर्षों से खड़ा विशाल एवं ऐतिहासिक बरगद का वृक्ष गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे अचानक जड़ समेत उखड़कर धराशायी हो गया। नगर की आस्था, इतिहास और पहचान का प्रतीक माने जाने वाला यह प्राचीन बरगद सीधे बागबाहरा मार्ग स्थित शीतला समिति कॉम्प्लेक्स तथा उसके सामने स्थित दुकानों पर भरभराकर गिर पड़ा।
पेड़ गिरते ही तेज धमाके जैसी आवाज पूरे इलाके में गूंज उठी, जिससे आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। घटना में एक-दो लोगों को मामूली चोटें आईं, लेकिन इतने विशाल वृक्ष के गिरने के बावजूद किसी प्रकार की बड़ी जनहानि नहीं होना लोगों ने ईश्वर की कृपा माना।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बरगद का आकार इतना विशाल था कि उसके गिरते ही पूरा समिति परिसर उसकी मोटी शाखाओं और विशाल तने से ढंक गया। सड़क पर चल रहे वाहन तत्काल रुक गए और बागबाहरा मार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। पेड़ बिजली के तारों और खंभों पर भी गिरा, जिससे कई बिजली तार टूट गए और पूरे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति तत्काल बंद करनी पड़ी। सूचना मिलते ही पुलिस, नगर पंचायत, विद्युत विभाग तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और राहत एवं मार्ग बहाली का कार्य प्रारंभ किया। बड़ी संख्या में नगरवासी भी घटनास्थल पर एकत्र होकर इस ऐतिहासिक दृश्य के साक्षी बने।
ग्राम समिति अध्यक्ष ओंकार शाह ने बताया कि यह बरगद लगभग चार शताब्दियों पुराना था और नगर में इसे केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था के केंद्र के रूप में देखा जाता था। इसी ऐतिहासिक बरगद के कारण इस स्थान की पहचान “ठाकुरदीया चौक” के नाम से बनी। वर्षों से लोग यहां श्रद्धापूर्वक माथा टेकते थे तथा धार्मिक अवसरों पर पूजा-अर्चना की जाती थी। नगर के बुजुर्गों का कहना है कि इस बरगद ने कई पीढ़ियों को अपनी शीतल छांव दी और यह छुरा नगर की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक था। इसके धराशायी होने से नगरवासियों में गहरा दुख और भावुकता का माहौल है।
घटना में शीतला समिति कॉम्प्लेक्स के भीतर के हिस्से को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचा, लेकिन बाहर स्थित तीन दुकानों के सेट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। दुकानों की छतें और सामने का ढांचा टूट गया, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि समय रहते लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
इस घटना के बाद विद्युत विभाग के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। टूटे हुए बिजली के तारों और क्षतिग्रस्त पोलों के कारण पूरे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो गई। विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी देर शाम तक जोखिम उठाकर टूटे तारों को हटाने और बिजली आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल करने में जुटे रहे। वहीं नगर पंचायत द्वारा जेसीबी एवं अन्य संसाधनों की सहायता से विशाल वृक्ष को हटाने का कार्य शुरू किया गया, ताकि मार्ग को शीघ्र यातायात के लिए खोला जा सके।
शीतला समिति के सदस्यों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस समय यह घटना हुई, उस समय चौक पर लोगों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी थी। ऐसे में इतने विशाल बरगद का गिरना किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था, लेकिन सौभाग्य से किसी की जान नहीं गई। लोगों ने इसे ठाकुरदीया की कृपा और दैवीय संरक्षण बताया। देर रात तक प्रशासन, नगर पंचायत और विद्युत विभाग की टीमें राहत कार्य में लगी रहीं। चार सौ वर्षों से नगर की पहचान बने इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के बरगद के धराशायी होने की घटना पूरे नगर में चर्चा का विषय बनी रही और अनेक लोगों की आंखें नम हो गईं।
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