आजादी के दिन स्कूल से दूर रहे बच्चे, शिक्षकों ने अकेले फहराया तिरंगा; 15 साल की मांग ने बदली स्वतंत्रता दिवस की तस्वीर

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) किशन सिन्हा:– स्वतंत्रता दिवस का दिन… देशभर में तिरंगा, राष्ट्रगान और बच्चों की खिलखिलाहट। स्कूलों में रंग-बिरंगे कार्यक्रम और आजादी के जश्न की तस्वीरें। लेकिन गरियाबंद जिले के छुरा अंतर्गत रुवाड़ गांव में 15 अगस्त का दृश्य कुछ ऐसा था, जिसने आजादी के मायने पर एक सवाल खड़ा कर दिया।

यहां तिरंगा तो दो जगह लहराया, लेकिन स्कूल और बच्चों के बीच दूरी साफ दिखाई दी। विद्यालय परिसर में शिक्षक मौजूद थे, ध्वज था, राष्ट्रगान था… लेकिन वे बच्चे नहीं थे, जिनके साथ हर साल शिक्षक स्वतंत्रता दिवस मनाते आए हैं। दूसरी ओर गांव के आंदोलन स्थल पर वही बच्चे अपने माता-पिता, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ तिरंगे के नीचे खड़े थे। एक तरफ स्कूल में बच्चों के बिना ध्वजारोहण हुआ, दूसरी तरफ बच्चों ने आंदोलन स्थल पर तिरंगे को सलामी दी।

यही रुवाड़ के स्वतंत्रता दिवस की सबसे मार्मिक तस्वीर रही।

बच्चे सामने थे, लेकिन स्कूल में नहीं…

विद्यालय परिसर में ध्वजारोहण के दौरान शिक्षकों के लिए यह स्थिति भावुक करने वाली थी। गांव में बच्चे मौजूद थे, लेकिन वे विद्यालय में नहीं थे। शिक्षक उन्हें अपनी आंखों के सामने देखते हुए भी उनके साथ स्कूल के आंगन में स्वतंत्रता दिवस नहीं मना सके। वहीं बच्चों के लिए भी यह दिन सामान्य नहीं था। जिस विद्यालय में उन्हें तिरंगे के नीचे खड़ा होना था, उसी विद्यालय से वे आंदोलन के कारण दूर थे।

स्कूल पास था, बच्चे भी पास थे… लेकिन दोनों के बीच मांगों और आंदोलन की एक ऐसी दूरी खड़ी थी, जो स्वतंत्रता दिवस के दिन और ज्यादा महसूस हुई।

15 साल से एक भवन का इंतजार

रुवाड़ के ग्रामीण करीब 15 वर्षों से हाई सेकेंडरी स्कूल भवन की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार तीन पंचायतों के लगभग 300 बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं। पर्याप्त भवन नहीं होने के कारण प्राथमिक से लेकर हाई सेकेंडरी स्तर तक की पढ़ाई अलग-अलग भवनों और सीमित संसाधनों के सहारे चल रही है। मिडिल स्कूल का भवन पहले बनाया जा चुका है, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक वह भी कई जगहों से जर्जर हो चुका है। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण विद्यार्थियों को परेशानी होती है।

भवन की कमी का असर पढ़ाई के समय पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार सुबह 7 से 11 बजे तक मिडिल स्कूल की कक्षाएं प्राथमिक शाला परिसर में संचालित होती हैं। इसके बाद 11 बजे से शाम 5 बजे तक प्राथमिक और हाई स्कूल की कक्षाएं लगती हैं। टीन शेड और अन्य उपलब्ध भवनों का सहारा लेकर किसी तरह शिक्षा व्यवस्था चल रही है।

आश्वासन मिलते रहे, समाधान का इंतजार जारी

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पिछले करीब डेढ़ दशक में मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों तक स्कूल भवन की मांग पहुंचाई। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत भी दर्ज कराई गई। हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर भी समस्या रखी गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने आंदोलन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि अपनी मांग की ओर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है।

तालाबंदी हटाई, आंदोलन नहीं

आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने पहले स्कूल में तालाबंदी की थी। सूचना मिलने पर शिक्षा एवं राजस्व विभाग के अधिकारी तथा पीपरछेड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया कि सरकारी भवन में तालाबंदी करना उचित नहीं है। अनुविभागीय अधिकारी विशाल महाराणा ने ग्रामीणों को बताया था कि स्कूल की समस्या और तालाबंदी की जानकारी जिला स्तर पर भेजी गई है तथा बच्चों को स्कूल भेजने का अनुरोध किया गया था।

इसके बाद ग्रामीणों ने स्कूल में तालाबंदी नहीं करने का फैसला लिया, लेकिन आंदोलन समाप्त नहीं किया।

अब खेती-किसानी के मौसम को देखते हुए ग्रामीण करीब 20 लोगों की क्रमिक हड़ताल कर रहे हैं। सुबह से शाम तक स्कूल के बाहर धरना दिया जा रहा है। अभिभावकों ने फिलहाल बच्चों को स्कूल नहीं भेजने का निर्णय लिया है और घर पर पढ़ाई कराने की बात कही है।

हरेली के बाद स्वतंत्रता दिवस भी धरना स्थल पर

रुवाड़ के ग्रामीणों ने आंदोलन के दौरान हरेली पर्व भी धरना स्थल पर मनाया था। अब स्वतंत्रता दिवस भी इसी आंदोलन के बीच मनाया गया। धरना स्थल पर गांव के बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग एकत्रित हुए। वैकल्पिक व्यवस्था के बीच राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। बच्चों ने भी तिरंगे को सलामी दी और स्वतंत्रता दिवस मनाया। यह दृश्य एक तरफ देशभक्ति से भरा था, तो दूसरी तरफ उसमें अपने विद्यालय की बुनियादी जरूरत पूरी नहीं होने की पीड़ा भी साफ दिखाई दे रही थी।

बीईओ बोले- भवन का प्रस्ताव भेजा गया, मरम्मत के लिए राशि जल्द

ब्लॉक शिक्षा अधिकारी किशन मतवाले ने बताया कि स्कूल का ताला दोपहर करीब 3 बजे खोल दिया गया था, लेकिन पालक अभी भी बच्चों को स्कूल भेजने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की मुख्य मांग हाई सेकेंडरी स्कूल भवन को लेकर है। इसके लिए प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है और वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए पुनः प्रस्ताव भेजने की कार्रवाई की जा रही है।

बीईओ के अनुसार मिडिल स्कूल भवन की मरम्मत के लिए जिला स्तर से कुछ दिनों में राशि मिलने की संभावना है। उनके स्तर से की जाने वाली कार्रवाई की जा चुकी है और आगे की प्रक्रिया जारी है।

आजादी के दिन रुवाड़ ने पूछा-बच्चों का स्कूल कब बनेगा?

15 वर्षों से स्कूल भवन की मांग और पांचवें दिन भी जारी आंदोलन के बीच रुवाड़ का यह स्वतंत्रता दिवस सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सवाल बनकर सामने आया है। आखिर कब रुवाड़ के बच्चों को ऐसा स्कूल भवन मिलेगा, जहां वे बिना किसी आंदोलन, असुविधा या वैकल्पिक व्यवस्था के अपने शिक्षकों के साथ तिरंगे के नीचे खड़े होकर स्वतंत्रता दिवस मना सकें? इस सवाल का जवाब अब ग्रामीण शासन-प्रशासन से चाहते हैं।

छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

https://chat.whatsapp.com/KHz20xYe8ouK4y2vqJnOXl

यह खबर भी जरुर पढ़े

15 साल से 12वीं तक स्कूल, फिर भी अपना भवन नहीं; ग्रामीणों ने की तालाबंदी

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button