गरियाबंद नगरपालिका में भाजपा पार्षद ने उठाए निर्माण कार्यों पर सवाल, 37.19 लाख के 5 कामों की जांच की मांग
जांच पूरी होने तक लंबित भुगतान रोकने की गुहार, सड़क-नाली निर्माण की गुणवत्ता से लेकर माप पुस्तिका, बिल-वाउचर और भुगतान अभिलेखों की जांच कराने की मांग

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– गरियाबंद नगर पालिका परिषद में 37.19 लाख रुपये के पांच सड़क एवं नाली निर्माण कार्यों को लेकर उठे सवाल अब चर्चा का विषय बन गए हैं। इसकी खास वजह यह है कि नगरपालिका में भाजपा की सत्ता है और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायत करने वाले पार्षद भी भाजपा से ही हैं।
जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 08 (डाक बंगला) के भाजपा पार्षद खेमसिंह बघेल ने पांच निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं और गुणवत्ताहीन निर्माण की आशंका जताते हुए जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग की है।
शिकायत में इन निर्माण कार्यों की कुल अनुमानित लागत 37.19 लाख रुपये बताई गई है। पार्षद ने मांग की है कि जांच पूरी होने और निर्माण कार्यों की वास्तविक मात्रा एवं गुणवत्ता का सत्यापन होने तक संबंधित कार्यों के लंबित भुगतान पर रोक लगाई जाए।
पांच निर्माण कार्य जांच के दायरे में, 37.19 लाख रुपये की लागत
पार्षद की शिकायत के अनुसार, जांच के लिए चिह्नित कार्यों में वार्ड क्रमांक 03 में अरुण देवांगन के घर से भावेश होटल तक सीसी सड़क एवं नाली निर्माण, वार्ड क्रमांक 07 में विश्वनाथ फेब्रिकेशन से पार्वती ध्रुव के घर तक सीसी सड़क एवं नाली निर्माण तथा वार्ड क्रमांक 05 में साहू सर के घर से सनत के घर तक सीसी सड़क एवं नाली निर्माण कार्य शामिल हैं। इसके अलावा शिकायत में दो अन्य निर्माण कार्यों को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है।
शिकायत में इन पांचों कार्यों की अनुमानित लागत क्रमशः 6.54 लाख, 8.10 लाख, 9.29 लाख, 8.06 लाख और 5.20 लाख रुपये बताई गई है। पार्षद ने मांग की है कि स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार निर्माण कार्यों की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, मोटाई और मौके पर किए गए कार्यों का मिलान कराया जाए, ताकि स्वीकृत राशि और वास्तविक निर्माण की स्थिति स्पष्ट हो सके।
सिविल लाइन की सीसी सड़क को लेकर भी उठाए सवाल

पार्षद खेमसिंह बघेल ने वार्ड क्रमांक 05 के सिविल लाइन क्षेत्र में सीसी सड़क निर्माण को लेकर प्रकाशित समाचार का भी शिकायत में उल्लेख किया है। इसमें सड़क निर्माण के दौरान कचरे के ऊपर रेत बिछाकर निर्माण किए जाने के आरोप तथा सेप्टिक टैंक के आसपास सड़क निर्माण की स्थिति पर सवाल उठाए जाने का हवाला दिया गया है।
पार्षद ने इन आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट करने के लिए संबंधित स्थल का तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने सड़क की मोटाई, आधार निर्माण, इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री और निर्धारित तकनीकी मानकों के पालन की जांच पर जोर दिया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट की भी हो जांच
जनदर्शन में कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र में पार्षद ने कहा है कि जांच केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए निर्माण कार्यों की स्वीकृत डिजाइन, तकनीकी स्वीकृति, प्राक्कलन, मूल माप पुस्तिका (एमबी), मूल्यांकन पत्रक, बिल-वाउचर, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की भी बारीकी से जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने निर्माण कार्यों की लंबाई, चौड़ाई और मोटाई का वास्तविक मापन कराने की मांग की है। आवश्यकता पड़ने पर निर्माण सामग्री के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से गुणवत्ता परीक्षण कराने का भी आग्रह किया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुए हैं या नहीं।
लंबित भुगतान रोकने की प्रमुख मांग
पार्षद की शिकायत में सबसे प्रमुख मांग यह है कि जब तक निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती और उनकी वास्तविक मात्रा एवं गुणवत्ता का सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक संबंधित कार्यों के लंबित भुगतान पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही निर्माण कार्यों से जुड़े मूल अभिलेखों को सुरक्षित रखने और जांच के लिए नगर पालिका से स्वतंत्र सक्षम तकनीकी अधिकारियों अथवा विशेषज्ञों की टीम गठित करने की मांग भी की गई है।
खेमसिंह बघेल ने शिकायत में कहा है कि यदि जांच के दौरान गुणवत्ताहीन निर्माण, गलत मूल्यांकन, नियमविरुद्ध भुगतान अथवा शासकीय राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और निर्माण एजेंसियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। दोषपूर्ण निर्माण पाए जाने पर संबंधित एजेंसी से नियमानुसार सुधारात्मक कार्य कराने की मांग भी की गई है।
अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
गरियाबंद नगर पालिका के पांच निर्माण कार्यों को लेकर भाजपा पार्षद द्वारा उठाए गए सवालों के बाद मामले में स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग महत्वपूर्ण हो गई है। यदि जांच होती है, तो इससे निर्माण कार्यों की वास्तविक गुणवत्ता, स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप किए गए कार्यों और शासकीय राशि के उपयोग की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल, पार्षद द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच से पुष्टि होना बाकी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन शिकायत पर क्या कदम उठाता है और निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने की दिशा में क्या कार्रवाई की जाती है।
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