रक्षाबंधन 2026: न भद्रा की छाया, न ग्रहण का साया, 28 अगस्त को पूरे दिन बांध सकेंगे राखी-पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन इस बार शुक्रवार, 28 अगस्त को पूरे दिन हर्षाेल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष रक्षाबंधन को लेकर सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि पर्व के दिन न तो भद्रा का साया रहेगा और न ही ग्रहण का कोई प्रभाव होगा।
पंडित शास्त्री ने बताया कि इस बार भद्रा गुरुवार को सुबह से शुरू होकर रात्रि 9.28 बजे समाप्त हो जाएगी। ऐसे में शुक्रवार को रक्षाबंधन के दिन बहनें पूरे दिन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। वहीं भूदेव ब्राह्मण भी अपने स्नेही यजमानों को रक्षा सूत्र बांध सकेंगे।
रक्षाबंधन में भद्रा का विशेष महत्व
शास्त्री जी ने बताया कि सनातन धर्म में रक्षाबंधन और होलिका दहन ऐसे प्रमुख पर्व हैं, जिनमें भद्रा काल का विशेष रूप से विचार किया जाता है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधने और होलिका दहन को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष सुखद संयोग बना है कि 28 अगस्त शुक्रवार को रक्षाबंधन के दिन भद्रा नहीं है। शुक्रवार को सूर्याेदय पूर्णिमा तिथि में हुआ है और वैष्णव परंपरा में उदयात तिथि को मान्यता दी जाती है। इसलिए पूरे दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाना शास्त्रसम्मत माना गया है।
ग्रहण को लेकर भी नहीं है कोई संशय
पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने स्पष्ट किया कि रक्षाबंधन पर्व पर ग्रहण का भी कोई साया नहीं है। आंशिक चंद्र ग्रहण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत में दिखाई नहीं देगा और इसलिए स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका प्रभाव भी मान्य नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि यह ग्रहण हंगरी, ऑस्ट्रिया, अंटार्कटिका, अटलांटिक एवं हिंद महासागर के कुछ हिस्सों, पश्चिम एशिया, यूरोप, अमेरिका, ब्राजील, फ्रांस और आयरलैंड सहित अन्य क्षेत्रों में दिखाई देने की बात कही गई है।
भारतीय परंपरा के अनुसार पर्व मनाने की अपील
पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने विशेष रूप से युवा और जेन-जी पीढ़ी से अपील की कि भाई-बहन के इस पावन पर्व को सनातन धर्म की परंपराओं, भारतीय संस्कारों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुरूप मनाएं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम, विश्वास, सुरक्षा और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक है। इसलिए सभी लोग इस पर्व को प्रेम, सौहार्द और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाएं, ताकि यह पर्व सभी के लिए शुभ और सुखद फलदायी बने।
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