गरियाबंद कलेक्ट्रेट में भूख हड़ताल पर बैठा परिवार, न्याय नहीं मिलने पर सामूहिक आत्मदाह की दी चेतावनी, जानिए पूरा मामला

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– गरियाबंद जिले में जमीन के लिए एक परिवार भूख हड़ताल पर है। बताया जा रहा है कि गरियाबंद जिले की अमलीपदर तहसील के अंतर्गत ग्राम खरीपदरा निवासी मुरहा नागेश अपनी पत्नी और तीन छोटे बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट के सामने भूख हड़ताल पर है। पीड़ित परिवार को अब कलेक्टर और सरकार से न्याय की उम्मीद है।
जानिए पूरा मामला
दरअसल, परिवार के मुखिया मुरहा नागेश के अनुसार, गांव के कुछ दबंगों ने राजस्व विभाग से सांठगांठ करके लगभग 7 एकड़ पुश्तैनी कृषि भूमि अपने नाम दर्ज करवा ली। अभिलेखों में त्रुटि के कारण यह जमीन अभिलेखों में दूसरी जगह दिखाई जा रही है। दबंगों ने उन्हें जमीन से बेदखल कर दिया है। बताया जाता है कि पीड़ित परिवार द्वारा कलेक्टर, तहसील, राजस्व विभाग तक दौड़ लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
मुरहा नागेश के अनुसार, उनके 3 बेटों और पत्नी का गुज़ारा मुश्किल हो गया है। हाल ही में अमलीपदर तहसील ने मुरहा के पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन विपक्ष ने इस आदेश को एसडीएम कोर्ट में चुनौती दी है। एसडीएम कार्यालय ने मुरहा के कृषि कार्य पर रोक लगा दी है। दबंगों ने फिर से परिवार की जमीन पर कब्जा कर लिया और मारपीट कर उन्हें बेदखल कर दिया। इसके बाद पीड़ित परिवार अब भूख हड़ताल कर न्याय की गुहार लगा रहा है।

सामूहिक आत्मदाह की दी चेतावनी
सोमवार, 14 जुलाई की सुबह से पीड़ित परिवार गरियाबंद कलेक्ट्रेट परिसर के सामने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गया है। मुरहा ने कहा कि अगर उनकी गुहार नहीं सुनी गई तो वे घर नहीं लौटेंगे। उन्होंने सरकारी परिसर में सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी भी दी है। प्रशासन अभी भी इस मामले पर चुप है, लेकिन गरियाबंद के लोगों के दिलों में यह सवाल गूंज रहा है। क्या गरीबों की जमीन वापस मिलेगी या फिर एक और परिवार मिट्टी में मिल जाएगा?
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