करोड़ों की नल-जल योजना पर सवाल: कहीं टंकी से बह रहा झरना, तो कहीं वर्षों से अधूरा पड़ा निर्माण

पांच गांवों में करोड़ों की योजना दम तोड़ती नजर आई

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) : किशन सिन्हा :-  गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत गाँवों में नल-जल योजना के तहत कराए गए पानी टंकी निर्माण कार्य अब ग्रामीणों के लिए सुविधा से अधिक परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं।ग्राम पंचायत दादर गांव नया अंतर्गत आने वाले पांच आश्रित गांवों में से तीन गांवों में आज तक निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है, जबकि जहां निर्माण पूरा बताया गया है वहां गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी लोगों को नियमित और सुरक्षित पेयजल सुविधा नहीं मिल पा रही है।

ग्राम कोडामाल में निर्मित पानी टंकी को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। कुछ महीने पहले ही हैंडओवर हुई इस टंकी में जैसे ही पानी भरा जाता है, टंकी के चारों ओर से बूंद-बूंद पानी रिसने लगता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी मजबूत जल संरचना से ज्यादा झरने जैसा प्रतीत होता है।

पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार आए दिन पाइपलाइन फूटने और लीकेज की शिकायतें सामने आती रहती हैं। घटिया पाइपलाइन और कमजोर निर्माण के चलते लोगों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरपंच ने बताया कि पंचायत इस स्थिति में हैंडओवर लेने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन विभागीय दबाव के चलते मजबूरी में इसे स्वीकार करना पड़ा। अब हालात ऐसे हैं कि पंचायत लगातार शिकायत करते-करते थक चुकी है।

कहीं भी सूचना बोर्ड नहीं

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर कहीं भी सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे यह जानकारी मिल सके कि कार्य किस एजेंसी या कंपनी द्वारा कराया गया, कितनी राशि स्वीकृत हुई और निर्माण अवधि क्या रही। बताया जा रहा है कि योजना के तहत नए जल स्रोत विकसित करने के बजाय पहले से पंचायत द्वारा उपयोग किए जा रहे नलकूपों में मोटर डालकर अस्थायी व्यवस्था बनाई गई थी। बाद में मोटर निकाल लिए जाने से पुराने पेयजल स्रोत भी प्रभावित हो गए और ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई।

ग्राम कलमी दादर में स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। यहां वर्षों पहले पानी टंकी निर्माण के लिए गहरा गड्ढा खोदकर कॉलम निर्माण हेतु सरिया और ढांचा लगाया गया था, लेकिन इसके बाद कार्य बंद हो गया। अब वहां जंग खाती सरिया और झाड़ियों से घिरा अधूरा निर्माण ही दिखाई देता है। ग्रामीणों को आज भी पेयजल के लिए शासकीय प्राथमिक शाला परिसर में उपलब्ध बोरवेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बोरवेल से कुछ मिनट तक ही पानी आता है, जिसके बाद जल स्रोत सूख जाता है और फिर पानी आने का इंतजार करना पड़ता है।

आज तक टंकी का निर्माण पूरा नहीं

ऐसी ही स्थिति आश्रित ग्राम फुलवारा में भी देखने को मिल रही है, जहां पानी टंकी निर्माण के लिए खोदा गया गहरा गड्ढा वर्षों से खुला पड़ा हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार मवेशी और अन्य बेजुबान जानवर उसमें गिरकर चोटिल हो चुके हैं। वहीं छोटे बच्चों के लिए भी यह बड़ा खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं हो सका। ग्राम पालमा में भी पानी टंकी निर्माण के लिए कॉलम खड़े कर दिए गए, लेकिन आज तक टंकी का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।

यदि पूरे पंचायत क्षेत्र की स्थिति पर नजर डालें तो पांच आश्रित गांवों में से केवल दो स्थानों पर निर्माण कार्य किसी तरह पूरा हुआ है, जबकि तीन गांवों में काम अधूरा पड़ा है। वहीं जिन जगहों पर निर्माण हुआ है वहां गुणवत्ता की स्थिति इतनी खराब बताई जा रही है कि ग्रामीण खुद उसकी मजबूती और भविष्य को लेकर आशंकित हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि विभाग और ठेकेदार से बार-बार संपर्क करने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। अब ग्रामीणों में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर नल-जल योजना का लाभ जमीन पर कब तक दिखाई देगा और करोड़ों की योजनाओं की जवाबदेही कौन तय करेगा।

राजिम विधायक से की मांग 

इसी तरह ग्राम पंचायत कनेसर के आश्रित मुख्यमंत्री गोद ग्राम केडीआमा-रमनपुर में भी टंकी का आधा अधूरा निर्माण कर छोड़ दिया गया है। यहाँ के ग्रामीणों को भी गर्मी में पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। ग्रामीणों ने स्थापना दिवस पर इसे जल्द पूरा करने की मांग राजिम विधायक रोहित साहू से की है ताकि ग्रामीणों को इस योजना का लाभ जल्द मिल सके।  

इस पूरे मामले को लेकर संबंधित विभाग की ओर से जिला अधिकारी विप्लव घितलहरे ने बताया कि” ठेकेदार काम नहीं कर रहा होगा उसको साल भर से फंड नहीं मिला है जिससे काम रूका होगा, टंकी में दिक्कत नहीं होगा फिर भी मैं पता कराता हूं।

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