बाढ़ में डूब रहे लोगों को रेस्क्यू टीम ने तुरंत बचाया, LPG टैंकर हादसे में भी टीम ने संभाला मोर्चा

मिनट-दर-मिनट प्रोटोकॉल का किया गया अभ्यास, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सहित जिला प्रशासन की टीम ने परखी आपदा से निपटने की तैयारियां

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) रायपुर :– लगातार बारिश के बीच बाढ़ की स्थिति और अचानक सामने आए एलपीजी टैंकर हादसे ने प्रशासनिक और आपदा राहत टीमों की तैयारियों की परीक्षा ली। हालांकि यह वास्तविक घटना नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए आयोजित मॉकड्रिल थी।

सेंध जलाशय, नवा रायपुर और शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के आसपास आयोजित इस अभ्यास में बाढ़, डूबते व्यक्ति, फंसे बच्चे-पशुओं तथा LPG गैस रिसाव जैसी आपात परिस्थितियों में बचाव एवं राहत की पूरी प्रक्रिया को मौके पर प्रदर्शित किया गया।

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित मॉकड्रिल में लगातार बारिश से बाढ़ की स्थिति निर्मित होने का परिदृश्य तैयार किया गया। मॉकड्रिल का निरीक्षण राजस्व एवं आपदा प्रबंधन सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, एनडीएमए के वरिष्ठ सलाहकार सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर रवीन्द्र गुरंग, असिस्टेंट कमांडेंट सीआईएसएफ त्रिपुरा एवं वरिष्ठ सलाहकार बिहार एसडीएमए डॉ. जीवन कुमार तथा उप सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन गजेंद्र सिंह ठाकुर ने किया। अधिकारियों ने रेस्क्यू टीमों की कार्रवाई का जायजा लिया और आपदा राहत दल को बेहतर समन्वय एवं त्वरित प्रतिक्रिया के लिए बधाई दी।

“बचाव-बचाव” की आवाज सुन अलर्ट हुई टीम

परसदा गांव में अचानक “बचाव-बचाव” की आवाज सुनाई दी। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। यहां एक ग्रामीण के पानी में डूबने की स्थिति का दृश्य सामने आया। इंसीडेंट कमांडर ने तत्काल राजस्व, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, पुलिस, स्वास्थ्य, बिजली, पीएचई, महिला एवं बाल विकास तथा जनपद पंचायत सहित संबंधित विभागों को आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए अलर्ट किया।

सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम आवश्यक उपकरणों और बोट के साथ मौके पर पहुंची। टीम ने पानी में फंसे व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला। प्राथमिक उपचार के दौरान सीपीआर दिया गया और आगे के उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। इस दौरान आपदा की स्थिति में सूचना मिलने से लेकर रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार और अस्पताल पहुंचाने तक अपनाए जाने वाले प्रोटोकॉल का व्यावहारिक अभ्यास किया गया।

पशुओं के फंसे होने की मिली सूचना

मॉकड्रिल के दौरान ग्रामीणों ने बाढ़ में पशुओं के फंसे होने की सूचना दी। रेस्क्यू टीम तत्काल मौके पर पहुंची। ऊंचे स्थान पर फंसी बकरियों तक पहुंचने के लिए टीम के सदस्यों ने रस्सियों की मदद ली और उन्हें बोट के जरिए सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टरों ने पशुओं का प्राथमिक उपचार किया।

इसी बीच फिर “बचाव-बचाव” की आवाज सुनाई दी। रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर देखा कि एक व्यक्ति और छोटा बच्चा बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं। दोनों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिया गया और एंबुलेंस से रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया गया।

LPG टैंकर हादसे में भी टीम ने संभाला मोर्चा

मॉकड्रिल के दूसरे चरण में शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, नवा रायपुर के पास LPG टैंकर दुर्घटना का परिदृश्य तैयार किया गया। अभ्यास के तहत दर्शाया गया कि टैंकर के ब्रेक कमजोर होने के कारण वह सड़क डिवाइडर से टकराकर बीच सड़क पर खड़ा हो गया और उससे LPG गैस का रिसाव शुरू हो गया। आसपास के लोगों में अफरा-तफरी की स्थिति बनी और सूचना LPG कंपनी के अधिकारियों को दी गई।

स्थिति नियंत्रित नहीं होने पर जिला प्रशासन को सूचना दी गई। इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नगर सेना और जिला प्रशासन की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं। टीमों ने क्षेत्र को सुरक्षित करते हुए गैस रिसाव की स्थिति को नियंत्रित करने की कार्रवाई की। हादसे में घायल वाहन चालक को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराते हुए नजदीकी अस्पताल भेजने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई।

इस अभ्यास का उद्देश्य LPG जैसी ज्वलनशील गैस से जुड़ी दुर्घटना की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, घटनास्थल की सुरक्षा, संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय, घायल व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सहायता और संभावित बड़े हादसे को रोकने की तैयारियों का परीक्षण करना था।

पूरे प्रोटोकॉल को मौके पर परखा

मॉकड्रिल के अंतिम चरण में एडीएम उमा शंकर बंदे, अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर, आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा, रायपुर एसडीएम नंदकुमार चौबे, डिप्टी कलेक्टर उपेन्द किंडो, जिला सेनानी पुष्पराज सिंह सहित राजस्व अमले ने बोट के माध्यम से क्षेत्र का निरीक्षण किया। टीम ने यह सुनिश्चित किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कोई अन्य व्यक्ति फंसा न हो।

इस अभ्यास में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नगर सेना और जिला प्रशासन की टीमें शामिल रहीं। मॉकड्रिल के माध्यम से प्रशासन ने यह परखा कि प्राकृतिक आपदा अथवा परिवहन दुर्घटना जैसी बहु-आपदा परिस्थितियों में विभिन्न विभाग कितनी तेजी और प्रभावी समन्वय के साथ कार्रवाई कर सकते हैं। अभ्यास में सूचना तंत्र, त्वरित प्रतिक्रिया, रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार, सुरक्षित निकासी और राहत व्यवस्था से जुड़े पूरे प्रोटोकॉल को मौके पर परखा गया।

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