सड़क पर मौत का साया! नवापारा-राजिम की सड़कों पर गौवंश और राहगीरों की सुरक्षा पर सवाल, लगातार हो रहे हादसे, फिर भी नहीं जाग रहा प्रशासन
एक महीने में नवापारा-राजिम क्षेत्र में कई हादसे, बीती रात राजिम में एक बाइक सवार गाय से टकराया, मौत, सड़क सुरक्षा समिति के निर्देशों पर उठ रहे सवाल

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– नवापारा और राजिम सहित गरियाबंद और रायपुर जिले के प्रमुख मार्गों पर सड़क पर मौजूद गौवंश के कारण हो रही दुर्घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ समय से क्षेत्र में गायों के सड़क हादसों में घायल होने और मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं। वहीं, ऐसे हादसों में वाहन चालक भी चोटिल हो रहे हैं। इससे स्थानीय गौ सेवकों और राहगीरों के बीच चिंता का माहौल है।
बीती सोमवार की रात राजिम में प्रेम रतन पैलेस के पास एक बाइक सवार सड़क पर मौजूद गाय से टकरा गया। हादसे में गाय की मौत हो गई, जबकि बाइक सवार घायल हो गया। उसके सिर में टांके लगाए गए। बताया जा रहा है कि हादसे के समय सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने और सड़क पर मौजूद पशु के कारण वाहन चालक को स्थिति संभालने में परेशानी हुई।
तर्री रोड पर कई गौवंश घायल होने की बात
स्थानीय गौ सेवकों का कहना है कि नवापारा के तर्री रोड पर पिछले करीब एक महीने में 7-8 गाय सड़क हादसों में घायल हो चुकी हैं। इसी तरह नवापारा से अभनपुर और नवापारा-राजिम मार्ग पर भी अलग-अलग समय में गौवंश के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। कुछ घटनाओं में तो गौवंश की मौतें भी हुई है।

इन घटनाओं के चलते गौ सेवकों में चिंता है। उनका कहना है कि सड़क पर मवेशियों की मौजूदगी से जहां गौवंश के लिए खतरा बना रहता है, वहीं अचानक पशु सामने आने से दोपहिया और अन्य वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका भी बढ़ जाती है।
अंधेरा और सड़क पर मवेशी बढ़ा रहे जोखिम
क्षेत्र के कुछ मार्गों पर रात के समय प्रकाश व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय लोगों की शिकायतें सामने आती रही हैं। सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने की स्थिति में वाहन चालकों को दूर से बैठे या खड़े मवेशी दिखाई नहीं देने की संभावना रहती है। अचानक सामने आने वाले पशु से बचने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होने का खतरा भी बना रहता है।
ऐसे में सड़क पर मवेशियों की मौजूदगी और प्रकाश व्यवस्था, दोनों को सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीरता से देखने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सड़क सुरक्षा समिति के निर्देशों पर उठ रहे सवाल
जिला और प्रदेश स्तर पर सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में सड़कों पर मौजूद मवेशियों को हटाने और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के संबंध में निर्देश दिए जाने की बात सामने आती रही है। हालांकि, स्थानीय लोगों और गौ सेवकों का कहना है कि इन निर्देशों के बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग सड़क सुरक्षा समिति के निर्देशों की जमीनी स्थिति की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि सड़कों पर मवेशियों की समस्या के समाधान के लिए नियमित व्यवस्था बनी रहे।
गौ सेवकों की मांग—स्थायी व्यवस्था हो
गौ सेवकों का कहना है कि केवल सड़क से मवेशियों को हटाना ही पर्याप्त नहीं होगा। गौवंश के लिए सुरक्षित स्थान, नियमित निगरानी और दुर्घटना संभावित मार्गों पर विशेष व्यवस्था जरूरी है। साथ ही प्रमुख सड़कों पर प्रकाश व्यवस्था की भी समीक्षा की जानी चाहिए। उनका कहना है कि सड़क हादसों में गौवंश की मौत या घायल होने की घटनाएं बेहद पीड़ादायक हैं। वहीं, इन्हीं घटनाओं में इंसानों के घायल होने की संभावना भी चिंता का विषय है।
अब समाधान की जरूरत

नवापारा-राजिम क्षेत्र में सामने आ रही घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि सड़क पर गौवंश की मौजूदगी और रात के समय सड़क सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर समन्वित तरीके से काम करने की आवश्यकता है।
स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि संबंधित प्रशासनिक और नगरीय निकाय अधिकारी दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर वहां मवेशियों की आवाजाही रोकने, प्रकाश व्यवस्था बेहतर करने और सड़क सुरक्षा के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में कदम उठाएं।
बीती रात का हादसा एक बार फिर यह सवाल छोड़ गया है कि गौवंश और राहगीरों की सुरक्षा के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था कब तक जमीन पर दिखाई देगी।
छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/KHz20xYe8ouK4y2vqJnOXl
यह खबर भी जरुर पढ़े
नवापारा ब्रेकिंग: सड़क पर अचानक सामने आई गाय, बचाने के प्रयास में बाउंड्रीवाल से टकराई कार











