नम आंखें, भारी मन और मां से फिर मिलने की आस… जयकारों के बीच मां दुर्गा को भावुक विदाई
नवापारा के शीतला तालाब में देर रात तक चला विसर्जन

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) नवापारा राजिम:– नौ दिनों तक जिन गलियों में मां दुर्गा के जयकारे गूंजते रहे, जिन पंडालों में भजन-कीर्तन से भक्ति की सरिता बहती रही और जिन चेहरों पर मां के आगमन की खुशी झलक रही थी, उन्हीं गलियों में सोमवार को विदाई की बेला ने हर किसी का मन भावुक कर दिया। मां दुर्गा की प्रतिमाओं और जंवारा के विसर्जन का समय आया, तो श्रद्धालुओं के कदम तो आगे बढ़ते रहे, लेकिन दिल मां को विदा करने के लिए तैयार नहीं था। किसी की आंखें नम थीं, तो कोई हाथ जोड़कर मां से अगले साल फिर आने की प्रार्थना कर रहा था। जुबां पर ‘जय माता दी’ के जयकारे थे, लेकिन दिल में मां के बिछड़ने की कसक साफ महसूस हो रही थी।
सिर पर जंवारा, हाथों में पूजा की थालियां और मन में अटूट श्रद्धा लिए भक्त विसर्जन यात्रा में शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच कहीं भक्त नाचते-गाते मां की भक्ति में लीन नजर आए, तो कहीं श्रद्धालु हाथ जोड़कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगल की कामना करते दिखे। हर किसी के मन में एक ही भावना थी—मां आज विदा जरूर हो रही हैं, लेकिन उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ बना रहे। यह सिर्फ प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं, बल्कि नौ दिनों तक बने उस भावनात्मक जुड़ाव की विदाई थी, जिसमें भक्तों ने मां को अपने घर-परिवार का हिस्सा मानकर पूजा और सेवा की थी।
जयकारों के बीच विदाई, नम आंखों से मां के दर्शन
नवमी के पावन अवसर पर शीतला मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। शीतला तालाब की ओर जाने वाले मार्ग पर हजारों श्रद्धालु और शहरवासी सड़क के दोनों ओर खड़े होकर जंवारा और मां दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन करते रहे। जैसे ही विसर्जन यात्रा आगे बढ़ती, पूरा मार्ग ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंज उठता। कई श्रद्धालु हाथ जोड़कर मां के सामने शीश नवाते रहे, तो अनेक लोग भावुक मन से मां की एक झलक अपने दिल में बसाने की कोशिश करते नजर आए।
नौ दिनों तक मां के दरबार में माथा टेकने वाले भक्तों के लिए यह पल किसी अपने को विदा करने जैसा था। आस्था के इस रिश्ते में शब्द कम पड़ जाते हैं, क्योंकि मां के प्रति श्रद्धा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि उम्मीद, विश्वास और भावनाओं से जुड़ी होती है। इसी विश्वास के साथ भक्त मां से प्रार्थना करते रहे कि उनके जीवन में सुख-शांति बनी रहे और अगले नवरात्रि में मां फिर से उसी उल्लास के साथ उनके बीच पधारें।
ढोल-नगाड़ों की थाप पर भक्ति
शहर के विभिन्न मोहल्लों और चौक-चौराहों पर सजे दुर्गा पंडालों से मां की प्रतिमाओं और जंवारा को लेकर समितियों के सदस्य कतारबद्ध होकर शीतला तालाब की ओर बढ़ते रहे। ढोल-नगाड़ों की थाप, भक्ति गीतों और जस गीतों ने पूरे शहर को भक्तिमय कर दिया। कहीं युवा मां के जयकारे लगाते हुए नृत्य कर रहे थे, तो कहीं महिलाएं और युवतियां सिर पर जंवारा लेकर श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रही थीं।

कई श्रद्धालु जमीन पर लेटकर अपनी आस्था और समर्पण प्रकट करते नजर आए। प्रतिमाओं को आकर्षक ढंग से सजाए गए वाहनों में विसर्जन स्थल तक ले जाया गया। यात्रा में शामिल हर टोली अपने साथ भक्ति, उत्साह और भावनाओं का अनूठा संगम लेकर चल रही थी। उत्सव की रौनक के बीच विदाई का दर्द भी साफ झलक रहा था। जयकारे गूंज रहे थे, कदम थिरक रहे थे, लेकिन हर भक्त के मन में मां के फिर से लौटने की प्रतीक्षा शुरू हो चुकी थी।
बाना धारण कर भक्तों ने दिखाई अटूट श्रद्धा

विसर्जन यात्रा में अनेक श्रद्धालु गालों, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों में छोटे-बड़े बाना धारण कर नाचते-गाते मां की आराधना करते दिखाई दिए। उनके लिए यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मां के प्रति समर्पण और अटूट विश्वास की अभिव्यक्ति थी। शीतला तालाब के घाट पर परंपराओं के अनुसार एक-एक कर मां दुर्गा की प्रतिमाओं और जंवारा का विसर्जन किया गया।
जैसे-जैसे विसर्जन का क्रम आगे बढ़ता गया, मां को अंतिम प्रणाम करने वाले श्रद्धालुओं की भावनाएं और गहरी होती गईं। कोई हाथ जोड़कर आशीर्वाद मांगता रहा, तो कोई मन ही मन अपनी परेशानियां मां के चरणों में अर्पित करता नजर आया। मां की विदाई के साथ ही नौ दिनों तक चली भक्ति और आराधना का यह विशेष अध्याय समाप्त हुआ। देर रात तक घाट पर प्रतिमाओं और जंवारा के विसर्जन का क्रम जारी रहा।
सेवा, सुरक्षा और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई विसर्जन यात्रा

विसर्जन यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शीतला तालाब मार्ग के विभिन्न स्थानों पर भक्तों द्वारा पेय पदार्थ और प्रसादी की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान सेवाभाव की झलक भी देखने को मिली। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस बल मुस्तैद रहा। थाना प्रभारी जितेंद्र दुबे अपनी टीम के साथ तैनात रहे और भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था संभालते रहे।

सोमवार को मां दुर्गा की विदाई के साथ शहर की गलियों में गूंजने वाले जयकारे धीरे-धीरे शांत हो गए, लेकिन भक्तों के मन में मां के प्रति आस्था और विश्वास पहले की तरह बना रहा। पंडालों की रौनक भले कम हो गई हो, ढोल-नगाड़ों की आवाज भले थम गई हो, मगर मां के भक्तों के दिलों में उनकी यादें हमेशा जीवंत रहेंगी।
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