राजिम में 4 लेन सड़क का भूमिपूजन: एक ही कार्यक्रम का अलग-अलग समय, नेताओं की अनदेखी और खाली कुर्सियों की चर्चा, जिम्मेदार कौन?

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– नवीन मेला स्थल राजिम चौबेबांध से लक्ष्मण झूला तक लगभग 3.50 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित 4 लेन सड़क निर्माण का भूमिपूजन भले ही विकास के बड़े दावों के साथ सम्पन्न हुआ, लेकिन पूरा आयोजन शुरुआत में ही अव्यवस्था और लापरवाही का शिकार बन गया। यह सड़क निर्माण कार्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है, जिससे न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों को भी नया आयाम मिलने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन विकास कार्य के इस शुभारंभ कार्यक्रम के साथ ही आयोजन को लेकर कई तरह की नाराजगी और सवाल भी सामने आए हैं।

सबसे पहले कार्यक्रम के समय को लेकर ही भारी भ्रम की स्थिति बन गई। लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी विज्ञापन में समय दोपहर 1 बजे बताया गया है, वहीं अन्य विज्ञापनों में समय 10 बजे बताया गया। मजे की बात की आमंत्रण कार्ड में भी समय 1 बजे दर्शाया गया है। जबकि वास्तविक रूप से भूमिपूजन 11 बजे जाकर “जैसे-तैसे” सम्पन्न हुआ। इस गड़बड़ी के कारण कई लोग भ्रम के चलते कार्यक्रम से दूर ही रह गए। इस लापरवाही ने आयोजन की तैयारी पर सीधे सवाल खड़े कर दिए।

वहीं, राजनीतिक स्तर पर भी आयोजन विवादों में रहा। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई वरिष्ठ और स्थानीय नेताओं को न तो आमंत्रण दिया गया और न ही सूचना, उनको विज्ञापन से भी बाहर कर दिया गया है। इससे कार्यकर्ताओं और उपेक्षित नेताओं में नाराजगी खुलकर सामने आई। इसे संगठन के भीतर समन्वय की कमी और गुटबाजी का संकेत माना जा रहा है।

स्थानीय मीडिया को किया नजरअंदाज

मीडिया को लेकर भी स्थिति संतोषजनक नहीं रही। स्थानीय पत्रकारों का आरोप है कि कार्यक्रम में उन्हें नजरअंदाज किया गया और केवल चुनिंदा “चहेते” लोगों को ही बुलाया गया। इसे पारदर्शिता के खिलाफ बताते हुए पत्रकारों ने नाराजगी जताई है।

कुर्सियाँ रही खाली

आयोजन स्थल की तस्वीरें भी कई सवाल छोड़ गईं। बड़े स्तर के कार्यक्रम के बावजूद कुर्सियां खाली नजर आईं, जिससे साफ हुआ कि समय भ्रम के चलते अपेक्षित भीड़ नहीं जुट पाई। कार्यक्रम में केवल कार्ड में छपे नाम वाले नेता और उनके साथ ही रहने वाले कुछ अन्य लोग नजर आए। यह स्थिति न केवल सूचना तंत्र की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि जनसंपर्क की हकीकत भी सामने लाती है। ऐसी लापरवाही का जिम्मेदार आखिर कौन ?

हालांकि मंच से 4 लेन सड़क को क्षेत्र के विकास, बेहतर आवागमन और धार्मिक-पर्यटन को बढ़ावा देने वाली बड़ी योजना बताया गया, लेकिन जमीनी हकीकत में आयोजन की खामियां ही ज्यादा चर्चा में रहीं। कुल मिलाकर, जहां एक ओर यह परियोजना क्षेत्र के लिए अहम मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम की अव्यवस्था, समय की गड़बड़ी, नेताओं और पत्रकारों की अनदेखी ने इस पूरे आयोजन की चमक को फीका कर दिया और इसे विवादों के घेरे में ला खड़ा कर दिया।

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