किसान रामाधार साहू बने बहुफसली खेती के प्रेरक उदाहरण, कम पानी में अधिक उत्पादन का सफल मॉडल कर रहा किसानों को आकर्षित

कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ ने पहुंचकर की सराहना

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :फिंगेश्वर विकासखण्ड के ग्राम सेंदर के किसान रामाधार साहू अपने आसपास क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। जिले के अधिकांश किसान परंपरागत रूप से धान की खेती पर निर्भर हैं, वहीं रामाधार साहू ने बदलते परिवेश और गिरते भूमिगत जल स्तर को ध्यान में रखते हुए दलहन, तिलहन एवं साग भाजी की बहु-फसली खेती कर रहे है।

रामाधार साहू ने लगभग 26 एकड़ खेत में विविध फसलों का उत्पादन कर केवल पानी की बचत ही नहीं की, बल्कि अच्छी आमदनी भी अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने 8 एकड़ में मक्का, 5 एकड़ में सरसों, 1 एकड़ में चना, 2 एकड़ में तिवरा, 2 एकड़ में बटरी, 2 एकड़ में मूंग, 2 एकड़ में धनिया, 1.5 एकड़ में कुम्हड़ा तथा 1 एकड़ में भिंडी की खेती की है। जिससे उन्हें काफी मुनाफा हो रहा है।

खेती का यह मॉडल लाभदायक

उन्होंने कहा कि इन सभी फसलों में धान की तुलना में पानी की आवश्यकता काफी कम होती है। विशेष रूप से सरसों की फसल में मात्र 3-4 बार हल्की सिंचाई पर्याप्त होती है। जिससे जल संरक्षण में बड़ी मदद मिलती है। वर्तमान समय में जब भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है। ऐसे में यह खेती का मॉडल लाभदायक साबित हो रहा है। इस नवाचार को देखने के लिए पूर्व में जिले के कलेक्टर बी.एस. उइके एवं जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने पहुंचकर इस पहल की सराहना की थी।

कृषि विभाग के मार्गदर्शन एवं किसान के दृढ निश्चय एवं लगन से यह पहल जल संरक्षण की दिशा में बेहतर है। रामाधार साहू ने अपने फसलों का बीज निगम में पंजीयन भी कराया है और उम्मीद जताई है कि सरकार यदि इन फसलों के लिए उचित मंडी एवं खरीदी केंद्र विकसित करे, तो और अधिक किसान इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि सरसों की संभावित खरीदी लगभग 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलने की उम्मीद है।

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