15वें वित्त की राशि के खर्च पर सवाल, EOW में शिकायत; तत्कालीन सचिव के कार्यकाल की जांच की मांग
खिलेश्वर गोस्वामी ने मूल अभिलेखों के सत्यापन और दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत अतरमरा में 15वें वित्त आयोग की राशि के व्यय को लेकर कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग उठी है। भाजपा आरटीआई प्रकोष्ठ के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं दुर्ग संभागीय प्रभारी खिलेश्वर गोस्वामी ने इस संबंध में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW), छत्तीसगढ़ के महानिदेशक को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक पंचायत को 15वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि से कराए गए कार्यों तथा तत्कालीन पंचायत सचिव चेतन सोनकर के कार्यकाल में हुए व्यय से संबंधित अभिलेखों की जांच कराने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर कुछ बिल-वाउचर और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए हैं।
बिलों में कमियां और हस्तलिपि को लेकर उठाए सवाल

खिलेश्वर गोस्वामी के अनुसार, आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के परीक्षण में कुछ बिलों पर बिल क्रमांक और जारी करने की तारीख का उल्लेख नहीं होने, कुछ बिलों में GST नंबर उपलब्ध नहीं होने तथा अलग-अलग दुकानदारों या फर्मों के नाम से प्रस्तुत बिलों की हस्तलिपि एक जैसी होने की आशंका जैसे बिंदु सामने आए हैं। उनका कहना है कि इन तथ्यों की स्वतंत्र जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल दस्तावेजों में कमियां दिखाई देने के आधार पर किसी बिल को फर्जी घोषित करना उचित नहीं है। जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि संबंधित बिल वास्तव में दुकानदारों या आपूर्तिकर्ताओं ने जारी किए थे या नहीं, सामग्री की खरीदी और आपूर्ति वास्तविक रूप से हुई थी या नहीं तथा भुगतान सही व्यक्ति अथवा फर्म को किया गया था या नहीं।
भौतिक सत्यापन कराने की मांग
शिकायत में पंचायत के मूल बिल-वाउचर, कैशबुक, लेजर, बैंक स्टेटमेंट, चेक एवं ई-पेमेंट विवरण, पंचायत प्रस्ताव, कार्यादेश, तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृतियों और माप पुस्तिका की जांच कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही दस्तावेजों में दर्ज विकास कार्यों का स्थल पर भौतिक सत्यापन करने और खरीदी गई सामग्री की मात्रा तथा उसके वास्तविक उपयोग का मिलान कराने का अनुरोध किया गया है।
गोस्वामी ने संबंधित दुकानदारों, आपूर्तिकर्ताओं, भुगतान प्राप्तकर्ताओं और पंचायत से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान दर्ज करने की मांग भी की है। वहीं, जिन बिलों की प्रमाणिकता पर संदेह है, उनकी आवश्यकता के अनुसार हस्तलेखन विशेषज्ञ से जांच कराने और जांच पूरी होने तक मूल अभिलेखों को सुरक्षित रखने की बात कही है, ताकि दस्तावेजों से छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
साक्ष्य मिलने पर FIR और राशि की वसूली की मांग
खिलेश्वर गोस्वामी ने मांग की है कि यदि जांच में फर्जी बिल-वाउचर तैयार करने, कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल, शासकीय राशि के दुरुपयोग अथवा अन्य आर्थिक अपराधों के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, शासकीय राशि का अनुचित भुगतान प्रमाणित होने पर नियमानुसार वसूली की कार्रवाई भी की जाए।
उन्होंने कहा कि पंचायतों को मिलने वाली वित्तीय सहायता का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देना और लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में इन निधियों के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना जरूरी है।
गोस्वामी ने EOW से शिकायत के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करने तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार कार्रवाई करने का आग्रह किया है। फिलहाल, शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की जांच और उनकी प्रमाणिकता सामने आने के बाद ही कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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