गरियाबंद में कमार विकास प्राधिकरण की राशि के बंदरबांट का आरोप, जांच की मांग
कमार समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कलेक्टर को सौंपा आवेदन, प्राधिकरण की कार्यशैली पर उठाए सवाल

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– कमार एवं भुंजिया जनजाति के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए संचालित विकास प्राधिकरणों की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समाज भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनसिंग सोरी ने गरियाबंद कलेक्टर को आवेदन सौंपकर कमार विकास प्राधिकरण के माध्यम से स्वीकृत विकास राशि के कथित दुरुपयोग और पूर्व में किए गए व्यय की जांच की मांग की है। उन्होंने योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के साथ ही अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
आवेदन में बनसिंग सोरी ने आरोप लगाया है कि कमार एवं भुंजिया जनजाति के लोग आज भी कई क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवनयापन कर रहे हैं। शिक्षा, रोजगार, आवास, सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं समुदाय के सामने बनी हुई हैं। शासन द्वारा जनजातीय विकास के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली राशि का अपेक्षित लाभ जमीनी स्तर पर नहीं पहुंचने का भी उन्होंने आरोप लगाया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि कमार समाज के विकास के लिए स्वीकृत राशि का कथित रूप से बंदरबांट किया जा रहा है और ऐसी योजनाओं में राशि खर्च किए जाने का आरोप है, जिनका समुदाय के लोगों को वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने पूर्व वर्षों में कमार विकास प्राधिकरण के माध्यम से किए गए कार्यों और खर्च की गई राशि की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि प्राधिकरण की ओर से अब तक स्वीकृत योजनाओं, कार्यों, हितग्राहियों और खर्च की गई राशि का रिकॉर्ड खंगाला जाए। साथ ही यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
1982 में हुआ था कमार विकास प्राधिकरण का गठन
गौरतलब है कि कमार जनजाति के समुचित विकास के उद्देश्य से शासन द्वारा वर्ष 1982 में गरियाबंद में पृथक कमार विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य कमार समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए योजनाएं तैयार करना तथा उनका प्रभावी क्रियान्वयन करना है।
हालांकि, कमार समाज के कुछ वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि प्राधिकरण के गठन को कई दशक बीत जाने के बावजूद समुदाय की अनेक समस्याएं अभी भी जस की तस बनी हुई हैं। ऐसे में विकास राशि के उपयोग और अब तक कराए गए कार्यों की जांच की मांग को लेकर कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और पूर्व में खर्च की गई विकास राशि तथा कराए गए कार्यों की जांच किस स्तर पर की जाती है।
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