कन्या महाविद्यालय नवापारा में HIV/ एड्स पर व्याख्यान का आयोजन, संक्रमण के कारणों एवं बचाव पर दी गई जानकारी

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :- विश्व एड्स दिवस पर शा. नवीन कन्या महाविद्यालय गोबरा नवापारा में HIV/ एड्स पर व्याख्यान का आयोजन 2 दिसंबर दिन सोमवार को किया गया। कार्यक्रम में एचआईवी संक्रमण के कारणों एवं बचाव के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही एड्स के साथ जी रहे लोगों के प्रति सामाजिक भेदभाव और भ्रांतियों को दूर करने के लिए जागरूकता गतिविधियों की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोबरा नवापारा के प्रभारी डॉ तेजेंद्र साहू ने बताया कि एड्स एक गंभीर बीमारी है और इस बीमारी के लिए जागरूक होना ही इससे बचाव का सबसे बेहतर तरीका है। इस बीमारी के होने के चार प्रमुख कारणों को जानना और इनसे बचकर इस बीमारी के प्रसार को नियंत्रित कर सकते हैं। एड्स के प्रति जागरूकता के साथ साथ, इसके साथ जी रहे लोगों के प्रति सामाजिक भेदभाव और भ्रांतियों को दूर किया जाना भी जरूरी है। इस अवसर पर महाविद्यालय स्टाफ सहित छात्र मौजूद रहे।
ऐसे करें बचाव
संक्रमण से बचाव के लिए यौन संबंधों के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करके, केवल लाइसेंस प्राप्त रक्त बैंक से जांच किए गए खून का इस्तेमाल, हर बार नई सिरिंज का इस्तेमाल और गर्भावस्था के दौरान एचआईवी की अनिवार्य रूप से जांच करवाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है। मरीज के साथ में खाना खाने, हाथ या गले मिलने, खाने के बर्तन, कपड़े, बिस्तर, शौचालय, टेलीफोन, स्विमिंग पूल के उपयोग, खांसने, छींकने से, मच्छरों के काटने या घरों में पाए जाने वाले कीड़े मकोड़े के काटने इत्यादि से एचआईवी का संक्रमण नहीं फैलता है।
HIV और AIDS में क्या अंतर है
इनके बीच बुनियादी फर्क यह है कि HIV एक वायरस है, जो हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है। जबकि AIDS एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है, जो HIV संक्रमण के कारण होती है। इसका मतलब होता है कि इम्यून सिस्टम गंभीर रूप से कमजोर हो गया है।
इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को HIV संक्रमण नहीं है तो उसे एड्स नहीं हो सकता है। अगर HIV संक्रमित व्यक्ति को शुरुआती स्टेज में ही इलाज मिल जाए तो उसे एड्स होने से रोका जा सकता है। वहीं ट्रीटमेंट न मिलने पर लगभग सभी संक्रमित लोगों को एड्स होने का खतरा रहता है।
निः शुल्क इलाज की सुविधा
उन्होंने बताया कि एचआईवी टेस्टिंग की सुविधा शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में निशुल्क करवाई जाती है। बीमारी के उपचार का पूरा खर्च भी शासन द्वारा नि:शुल्क उठाया जाता है।
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