चैत्र नवरात्र 2026 : नवसंवत्सर के साथ शक्ति का होगा आगमन, जानिए घट स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना सर्वश्रेष्ठ - पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– गुरुवार 19 मार्च 2026 से वासंतिक नवरात्र पर्व का शुभारंभ नवसंवत्सर के साथ हो रहा है। यह ऋतुओं के संधिकाल में शक्ति और शक्तिधर की उपासना का विशेष अवसर माना जाता है। नगर के ज्योतिष भूषण पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि वर्ष में चार नवरात्र होते हैं – दो गुप्त और दो जागृत। चैत्र शुक्ल पक्ष में प्रारंभ होने वाले वासंतिक नवरात्र का विशेष महत्व है।

उन्होंने बताया कि इस बार उदिता तिथि में अमावस्या होने के कारण चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का क्षय हो गया है, हालांकि सूर्योदय के कुछ समय बाद प्रतिपदा तिथि लग रही है। इस कारण 19 मार्च को अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 बजे के बीच मध्यान्ह काल में जगदम्बा की घट स्थापना, ज्योत प्रज्वलन एवं जँवारा बोने का श्रेष्ठ समय है।

नवरात्रि पूर्ण 9 दिनों की रहेगी

इसके अलावा चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग के अभाव में सुबह 10:41 से दोपहर 1:36 बजे तक भी घट स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार देवी स्थापना और विसर्जन प्रातःकाल में करना उत्तम बताया गया है।पण्डित शास्त्री ने आगे बताया कि 23 मार्च सोमवार को पंचमी, 26 मार्च गुरुवार को अष्टमी पर हवन-पूजन तथा 27 मार्च शुक्रवार को श्री राम नवमी का पर्व मनाया जाएगा। इस वर्ष नवरात्रि पूर्ण 9 दिनों की रहेगी।

उन्होंने बताया कि नवरात्रि के दौरान साधक एवं उपासक दुर्गा सप्तशती का पाठ, श्री रामचरितमानस का नवान्ह पारायण, व्रत, एकासन आदि कर माता जगदम्बा की आराधना करते हैं। इससे उन्हें देवी की कृपा प्राप्त होती है तथा आध्यात्मिक ऊर्जा का संचय एवं संवर्धन होता है। भारतीय नववर्ष के शुभारंभ के साथ ही पण्डित शास्त्री ने सभी क्षेत्रवासियों के लिए मंगलमय जीवन की कामना की है।

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