20 साल का सफर : केडीआमा-रमनपुर गांव ने परंपरा और उत्साह के साथ मनाया स्थापना दिवस
जिला पंचायत सदस्य इंद्रजीत महाडिक का हुआ जोरदार स्वागत

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक स्थित केडीआमा-रमनपुर गाँव ने 2026 में अपना 20वाँ स्थापना दिवस ऐतिहासिक अंदाज में मनाया। 2006 में पुनर्वास के तहत बसे इस गाँव ने दो दशक पूरे होने पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सामूहिक भोज और लोक परंपराओं के साथ जश्न मनाया। कार्यक्रम में सबसे कम उम्र में जिला पंचायत सदस्य बनने वाले इंद्रजीत महाडिक का ग्रामीणों द्वारा जोरदार स्वागत किया गया।
गाँव के प्रमुख दीनदयाल विश्वकर्मा ने बताया कि महाडिक परिवार का इस क्षेत्र से पुराना नाता है। उनके परदादा स्व. रायबहादुर महाडिक 84 गाँवों के जमींदार थे, जिसमें केडीआमा-रमनपुर भी शामिल था। उनके पूर्वज समय-समय पर यहाँ आते-जाते रहते थे। करीब 100 साल तक यह इलाका वीरान रहा, लेकिन 2006 में पुनर्वास के बाद गाँव फिर से बस गया। अब नवरात्रि जैसे पावन अवसरों पर महाडिक परिवार के सदस्य आकर ग्रामीणों से जुड़ते हैं।
स्थापना दिवस के अवसर पर ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से फरा-मुठिया तैयार किया और पारंपरिक लोकगीतों व नाचा-गम्मत के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। आयोजन में विधायक रोहित साहू, जिला पंचायत सभापति शिवांगी चतुर्वेदी और अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। ग्रामीणों की बड़ी संख्या की उपस्थिति ने आयोजन को यादगार बना दिया।
सांस्कृतिक संरक्षण के लिए कर रहे काम
इस पूरे आयोजन के पीछे राजकुमार यादव और गौकरण मानिकपुरी की जोड़ी की भूमिका अहम रही। लोहरसी निवासी राजकुमार यादव क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि इंद्रजीत महाडिक के प्रतिनिधि के रूप में समय-समय पर गाँव पहुँचते हैं और ग्रामीणों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाते हैं। फुलझर निवासी गौकरण मानिकपुरी लोककला और नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों को जागरूक करते हैं। नाचा-गम्मत और लोकगीतों के माध्यम से वे सरकारी योजनाओं और स्थानीय परंपराओं की जानकारी देते हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता गजेश्वर सिन्हा और जनपद सदस्य अवधराम साहू इन्हें ‘बैल जोड़ी’ कहते हैं। उनका कहना है, “अगर ये लोग पत्थर में भी खड़े हो जाएं तो पत्थर से पिघल कर पानी निकल जाता है।” दोनों बिना किसी सरकारी मानदेय के वर्षों से गाँव के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं।
गौरतलब है कि 2019 में राजकुमार यादव और गौकरण मानिकपुरी ने गाँव का घर-घर सर्वे कर 38 परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए तीन दिवसीय शिविर लगवाया था। इस शिविर में 47 राशन कार्ड, 42 आयुष्मान कार्ड, 19 पेंशन और 28 उज्ज्वला गैस कनेक्शन जारी हुए। इसके बाद 9 परिवार जो पलायन कर चुके थे, वे वापस लौटे। गाँव में स्कूल ड्रॉपआउट कम हुआ और लोगों की योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ी।
लोककथाओं को कर रहे रिकॉर्ड
अब दोनों दशकुड धाम, जामवंत दादा की गुफा और सुरुंगपानी गुफा से जुड़ी लोककथाओं को रिकॉर्ड कर रहे हैं। 70 से अधिक बुजुर्गों के इंटरव्यू संग्रहीत किए जा चुके हैं। उनका उद्देश्य इस क्षेत्र को इको-टूरिज्म और रामायण सर्किट से जोड़कर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है।
ग्रामीणों का कहना है कि 20वें स्थापना दिवस ने गाँव को एक नई पहचान दी है। पुराने इतिहास को याद करते हुए नई पीढ़ी अब अपने गाँव को विकास की ओर ले जाने के लिए एकजुट हो रही है।
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