बिहान से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं हुलेसिया वर्मा, बनीं “लखपति दीदी”, समूह से मिला सहारा,

 आज प्राकृतिक खेती की प्रशिक्षक एवं सफल उद्यमी के रूप में बना रहीं पहचान

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) रायपुर :– बिहान योजना से जुड़कर महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है जय मां संतोषी स्व सहायता समूह की सदस्य हुलेसिया वर्मा की, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।

वर्ष 2016 में 12 गरीब परिवारों की महिलाओं ने मिलकर “जय मां संतोषी स्व सहायता समूह” का गठन किया। समूह में दो विधवा एवं एक परित्यक्ता महिला सदस्य भी शामिल हैं। इन्हीं में से एक सदस्य श्रीमती वर्मा के पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई। चार बच्चों के पालन-पोषण एवं शिक्षा की चिंता के बीच जीवन अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा था। ऐसे समय में बिहान योजना एवं समूह की महिलाओं ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की।

बिहान योजना से जुड़ने के बाद श्रीमती वर्मा ने उद्योग सखी के रूप में कार्य प्रारंभ किया, जिससे उन्हें प्रतिमाह 2540 रुपये का मानदेय मिलने लगा। उनकी कार्यकुशलता एवं सक्रियता को देखते हुए नेशनल सपोर्ट संस्था “प्रदान” द्वारा उन्हें एन.एस.ओ.सी.आर.पी. के रूप में चयनित किया गया। जो महिला पहले लोगों से बात करने में झिझकती थीं, आज वही गाँव, विकासखंड एवं जिला स्तर पर महिलाओं को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे रही हैं।

आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

श्रीमती वर्मा ने “लखपति दीदी” द्वारा स्थानीय स्तर पर फलों का मूल्य संवर्धन करते हुए पपीते की बड़ी, आम एवं नींबू का अचार, साबुदाना पापड़ तथा चिप्स निर्माण का कार्य शुरू किया। इसके साथ ही वे सिलाई कार्य भी कर रही हैं। साथ ही उनकी बड़ी बेटी बी.एससी. के बाद पी.जी.डी.सी.ए. की पढ़ाई कर रही है, दूसरी बेटी एल.एल.बी. में अध्ययनरत है, एक बेटा सातवीं एवं तीसरी बेटी दसवीं कक्षा में अध्ययनरत है।

गाँव में आवागमन की सुविधा नहीं होने के बावजूद श्रीमती वर्मा ने स्वयं के लिए स्कूटी खरीदकर आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। कृषि कार्य (धान एवं सब्जी की खेती), मूल्यवर्धन गतिविधि (साबूदाना पापड़, बड़ी, अचार, चिप्स) एवं केडर मानदेय (प्रदान, एन.एस.ओ.) से उन्हें लगभग 1 लाख 45 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है।

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