रायपुर बेंद्री की थ्रीडी फैक्ट्री में ब्लास्ट: नाबालिग समेत तीन की मौत, शव के उड़े चिथड़े, 200 मीटर दूर तक बिखरे अंग

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित बेंद्री की थ्रीडी इनोवेशन फैक्ट्री में अचानक ब्लॉस्ट हो गया, जिसमें तीन मजदूरों मौत हो गई। धमाका इतना भयावह था कि उसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और मृतकों के शरीर के अंग लगभग 200 मीटर दूर तक बिखर गए। हादसे के बाद फैक्ट्री में चीख-पुकार, भगदड़ और मातम का मंजर छा गया।
नाबालिग समेत तीन की मौत
हादसे में मध्यप्रदेश के डिंडौरी निवासी लाल सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कमल सिंह (25) ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। तीसरे मृतक की पहचान जांजगीर-चांपा निवासी 17 वर्षीय अरुण पांडे के रूप में हुई, जो हादसे के वक्त ऑक्सीजन सिलेंडर बदल रहा था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ, एफएसएल और प्रशासनिक अधिकारियों ने देर रात तक राहत एवं जांच अभियान जारी रखा।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री के फेरो एलॉय डिवीजन में फर्नेस की लान्सिंग के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर में भीषण विस्फोट हुआ। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास काम कर रहे मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कुछ ही क्षणों में पूरा परिसर मलबे में बदल गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि बिजली गुल होने के कारण कुछ मिनट तक किसी को यह समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। जब रोशनी लौटी तो फैक्ट्री का दृश्य दिल दहला देने वाला था। जमीन पर बिखरे शवों और अंगों की पहचान तक करना मुश्किल हो गया था।
हादसे के समय टेपिंग यूनिट में मौजूद मजदूरों ने बताया कि विस्फोट इतना जबरदस्त था कि उनके सामने काम कर रहे साथी पलभर में मौत के शिकार हो गए। कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए थे। कुछ मजदूरों के अनुसार, शरीर के टुकड़ों को बोरी में भरकर हटाना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ऐसा भयावह दृश्य उन्होंने जिंदगी में कभी नहीं देखा।
बिना प्रशिक्षण और बिना सुरक्षा कराया जाता था काम
हादसे के बाद फैक्ट्री के श्रमिकों ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जोखिम भरे कार्यों के बावजूद उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाते थे। कई मजदूर बिना हेलमेट, दस्ताने और सुरक्षा जूतों के काम करने को मजबूर थे। आरोप है कि नए श्रमिकों को उचित प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता था और सीधे फर्नेस जैसे अत्यंत संवेदनशील कार्यों में लगा दिया जाता था।
टेपिंग यूनिट के पास बन रहा था खाना
घटना के समय कुछ मजदूर टेपिंग यूनिट के समीप भोजन बना रहे थे। बताया गया कि गैस समाप्त होने के कारण भट्ठी से निकलने वाली गर्मी का उपयोग खाना पकाने में किया जा रहा था। इसी दौरान अचानक हुआ धमाका पूरे परिसर को दहला गया।
फिलहाल पुलिस, एफएसएल, श्रम विभाग और प्रशासन की टीम संयुक्त जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
फैक्ट्री सील, 30-30 लाख मुआवजे का ऐलान
हादसे के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री को तत्काल बंद करा दिया। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 30-30 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि उद्योगों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाएगा और इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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