चार साल में नहीं मिला 9.71 लाख मुआवजा: सरकारी दफ्तर कुर्की वारंट लेकर गरियाबंद पहुंचा कोर्ट, मचा हड़कंप, जानिए पूरा मामला

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– न्यायालय के आदेश के बावजूद सड़क हादसे में मृतक के आश्रित परिवार को मुआवजा राशि का भुगतान नहीं करना गरियाबंद के आदिवासी विकास विभाग के लिए भारी पड़ गया। करीब 9 लाख 71 हजार रुपये के मुआवजे की वसूली को लेकर न्यायालय ने विभाग की चल संपत्ति की कुर्की का वारंट जारी कर दिया। मंगलवार को जैसे ही न्यायालय का मचकुरी अमला पीड़ित परिवार और अधिवक्ताओं के साथ विभागीय कार्यालय पहुंचा, अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
हालांकि, मौके पर विभागीय अधिकारियों और पीड़ित पक्ष के बीच हुई बातचीत के बाद आपसी सहमति बन गई और फिलहाल कुर्की की कार्रवाई टल गई। विभाग को मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुछ दिनों की मोहलत मिली है। लेकिन तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो कुर्की की तलवार दोबारा लटक सकती है।
चार साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा

पूरा मामला वर्ष 2022 में हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि आदिवासी विकास विभाग के एक वाहन की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। हादसे के बाद मृतक के आश्रित परिवार ने मुआवजे के लिए न्यायालय की शरण ली। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने विभाग को मृतक के आश्रित परिवार को 9.71 लाख मुआवजा राशि देने का आदेश दिया था। लेकिन न्यायालय के आदेश के बावजूद लंबे समय तक राशि का भुगतान नहीं हो सका।
परिजन मुआवजा पाने के लिए विभागीय कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। जब उन्हें राहत नहीं मिली तो उन्हें एक बार फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
कुर्की वारंट लेकर सीधे कार्यालय पहुंचा कोर्ट अमला

मुआवजा भुगतान में देरी को लेकर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए विभाग की चल संपत्ति की कुर्की के लिए वारंट जारी कर दिया। मंगलवार को न्यायालय का मचकुरी अमला पीड़ित परिवार और उनके अधिवक्ताओं के साथ आदिवासी विकास विभाग कार्यालय पहुंचा। कोर्ट अमले के कार्यालय पहुंचते ही वहां हड़कंप की स्थिति बन गई।
कार्यालय की संपत्ति कुर्क होने की स्थिति को देखते हुए विभागीय अधिकारी भी तत्काल सक्रिय हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सहायक आयुक्त के न्यायालय पहुंचने की बात सामने आई, जहां आगे की कार्रवाई को लेकर पीड़ित पक्ष से चर्चा की गई।
9.71 लाख ने बढ़ाई विभाग की मुश्किल
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि न्यायालय के आदेश के बावजूद करीब चार साल से मृतक के आश्रित परिवार को मुआवजा नहीं मिल सका। आखिरकार मामला कार्यालय की चल संपत्ति की कुर्की तक पहुंच गया। कोर्ट अमले की मौजूदगी ने विभागीय स्तर पर मुआवजा भुगतान में हुई देरी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आपसी सहमति बनी, फिलहाल टली कुर्की
मौके पर हुई बातचीत के बाद विभाग और पीड़ित पक्ष के बीच आपसी सहमति बनी। सूत्रों के अनुसार, विभाग को मुआवजा संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुछ दिनों का समय दिया गया है। सहमति बनने के बाद फिलहाल कुर्की की कार्रवाई रोक दी गई। लेकिन यह राहत फिलहाल अस्थायी है। यदि तय समय में मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया तो न्यायालय के आदेश के तहत दोबारा कुर्की की कार्रवाई शुरू हो सकती है।
कब मिलेगा परिवार को उनका हक?
न्यायालय से आदेश मिलने के बावजूद मृतक के परिवार को करीब 9.71 लाख की मुआवजा राशि के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। परिवार का कहना है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी उन्हें अपने हक की राशि पाने के लिए लगातार कानूनी और विभागीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। फिलहाल कुर्की टल गई है और विभाग को कुछ दिनों की मोहलत मिली है। अब निगाह इस बात पर टिकी है कि क्या आदिवासी विकास विभाग तय समय में मुआवजा राशि का भुगतान कर मृतक के परिवार को राहत देगा, या फिर अगली बार कोर्ट अमला कुर्की की कार्रवाई को अंजाम देगा?
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