अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का अद्भुत संयोग, 4 सितंबर को जन्मेंगे कन्हैया; नवापारा के मंदिरों में जन्मोत्सव की तैयारी

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के विशेष संयोग में 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। सभी संप्रदायों के भक्तों के लिए शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाना श्रेयस्कर रहेगा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर सनातनी समाज और श्रीकृष्ण भक्तों में खासा उत्साह है। भक्त भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की इस पावन रात्रि का आतुरता से इंतजार कर रहे हैं।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि काल गणना में तिथियों के शुद्धा-विद्धा आदि कई भेद होते हैं। उदय एवं अस्त तिथियों के आधार पर भी पर्व मनाने के संबंध में विद्वत सभा द्वारा निर्णय लिया जाता है, किंतु तत्काल व्यापिनी तिथि को अधिक मान्यता दी जाती है। इसी दृष्टि से इस वर्ष शुक्रवार को अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र से युक्त जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि द्वापर युग के 8 लाख 63 हजार 874 वर्ष, 6 माह और 22 दिन पश्चात भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को अर्धरात्रि के समय मथुराधीश कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था। आज कलियुग के 5256 वर्ष बीत जाने के बाद भी भगवान श्रीकृष्ण के भक्त उसी उत्साह, उल्लास और श्रद्धा-भक्ति के साथ जन्माष्टमी का पर्व मनाते आ रहे हैं।

गुरुवार रात से अष्टमी तिथि प्रारंभ

पंडित शास्त्री के अनुसार गौतमी सूत्र, श्रीविष्णुधर्मोत्तर शास्त्र एवं स्कंद पुराण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इसमें आबाल-वृद्ध सभी नर-नारियों द्वारा व्रत करने की बात कही गई है। मान्यता है कि जन्माष्टमी का व्रत करने से करोड़ों अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है और मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सभी अवतारों में पूर्णावतार माने गए हैं। वे माखन चोर और नंदकिशोर के रूप में भक्तों के प्रिय हैं तो गोविंद-गोपाल के रूप में पूजनीय भी हैं। वहीं कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश देकर उन्होंने मानव कल्याण के अनमोल सूत्र प्रदान किए।

पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि गुरुवार रात 2 बजकर 26 मिनट से अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी और शुक्रवार रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। शुक्रवार को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक अष्टमी तिथि रहने के साथ ही रोहिणी नक्षत्र में सूर्योदय होने के कारण इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को ही मनाना उचित है।

उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। ऐसे में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के इस विशेष संयोग के चलते देश-दुनिया के साथ ही नवापारा राजिम के श्री राजीव लोचन मंदिर, श्री राधाकृष्ण मंदिर, श्री सत्यनारायण मंदिर एवं श्री गोवर्धननाथ जी की हवेली में भी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव 4 सितंबर को बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। 

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