राज्य जीएसटी विभाग की बड़ी कार्रवाई: वर्ष 2021-22 की विभागीय सीमित प्रतियोगिता परीक्षाएं निरस्त, जांच में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा

चयनित कर्मचारियों को मूल पदों पर वापस भेजने के आदेश, तत्काल प्रभाव से लागू होगा निर्णय

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– छत्तीसगढ़ राज्य जीएसटी विभाग ने विभागीय भर्ती एवं चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए वर्ष 2021 और 2022 में आयोजित दो सीमित प्रतियोगिता परीक्षाओं को निरस्त कर दिया है।

कार्यालय आयुक्त, राज्य कर, छत्तीसगढ़ द्वारा लिपिक वर्ग से वाणिज्यिक (राज्य) कर निरीक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए आयोजित दोनों परीक्षाओं को प्रारंभ से ही शून्य घोषित करते हुए इनके आधार पर संपन्न संपूर्ण चयन प्रक्रियाएं और नियुक्ति आदेश निरस्त कर दिए गए हैं। इसके फलस्वरूप दोनों परीक्षाओं के माध्यम से राज्य कर निरीक्षक के पद पर नियुक्त सभी प्रभावित कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर प्रत्यावर्तित करने के आदेश जारी किए गए हैं। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

राज्य जीएसटी विभाग द्वारा लिपिक वर्ग के कर्मचारियों की वाणिज्यिक (राज्य) कर निरीक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए 19 दिसंबर 2021 और 26 जून 2022 को सीमित प्रतियोगिता परीक्षाएं आयोजित की गई थीं। इन परीक्षाओं के आधार पर क्रमशः 27 एवं 30 दिसंबर 2021 तथा 1 जुलाई 2022 को चयनित कर्मचारियों की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए थे। बाद में दोनों परीक्षाओं एवं चयन प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त होने पर प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित की गई।

जांच समिति ने उपलब्ध अभिलेखों का विस्तृत परीक्षण कर 3 जुलाई 2026 को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें परीक्षा आयोजन से लेकर आरक्षण, पात्रता निर्धारण, उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन और अंतिम चयन तक अनेक गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

दोनों परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं

जांच समिति ने पाया कि वर्ष 2021 और 2022 की दोनों सीमित प्रतियोगिता परीक्षाओं के आयोजन से पहले आरक्षण रोस्टर के अनुसार पदों का वर्गवार निर्धारण नहीं किया गया था। इससे आरक्षण संबंधी संवैधानिक प्रावधानों तथा सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराने के सिद्धांत का पालन प्रभावित हुआ। दोनों परीक्षाओं में परीक्षार्थियों की उपस्थिति पंजी का संधारण भी नहीं किया गया था। इसके अतिरिक्त परीक्षाओं के समेकित परिणाम और अंक तालिकाएं तैयार नहीं की गई थीं, जिससे अभ्यर्थियों की वास्तविक मेरिट का निष्पक्ष एवं विश्वसनीय परीक्षण संभव नहीं हो सका।

अनुचित लाभ पहुंचाने का मामला

जांच में वर्ष 2021 की परीक्षा से संबंधित एक महत्वपूर्ण अनियमितता भी सामने आई। समिति ने पाया कि कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शैक्षणिक योग्यता के निर्धारण की तिथि परीक्षा वर्ष की पहली जनवरी के स्थान पर 15 नवंबर 2021 निर्धारित की गई थी। पात्रता की निर्णायक तिथि में इस प्रकार परिवर्तन किए जाने से समान परिस्थितियों वाले अभ्यर्थियों के बीच असमानता उत्पन्न हुई।

जांच प्रतिवेदन के अनुसार इस बदलाव से कुछ अभ्यर्थियों को ऐसा लाभ मिलने की स्थिति बनी, जो निर्धारित सामान्य मापदंड लागू किए जाने पर उपलब्ध नहीं होता। इससे लोक नियोजन में समान व्यवहार एवं समान अवसर के सिद्धांत प्रभावित हुए।

उत्तर-पुस्तिकाओं में एक जैसे उत्तर

जांच समिति ने दोनों परीक्षाओं में पाया कि चयनित अभ्यर्थियों में से अधिकांश की उत्तर-पुस्तिकाओं में एक समान उत्तर लिखे गए थे, जिसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं था। इसके अतिरिक्त उत्तर-पुस्तिकाओं पर अभ्यर्थियों की पहचान गोपनीय रखने के लिए कोडिंग पद्धति भी नहीं अपनाई गई थी। इन अनियमितताओं से परीक्षा संचालन की स्वतंत्रता, गोपनीयता और मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए।

जांच में यह भी सामने आया कि कतिपय अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उत्तर-पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन किया गया। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार कुछ अभ्यर्थियों का चयन पुनर्मूल्यांकन में अंक बढ़ाए जाने के परिणामस्वरूप ही हुआ। वर्ष 2022 की परीक्षा में चयन समिति के अध्यक्ष, सदस्यों एवं परीक्षा नियंत्रक द्वारा भी उत्तर-पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन में भाग लिए जाने की अनियमितता सामने आई। चयन प्रक्रिया से सीधे जुड़े पदाधिकारियों की पुनर्मूल्यांकन में भागीदारी ने मूल्यांकन की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उत्पन्न किए।

उत्तर-पुस्तिकाओं की संख्या में भी मिली गंभीर विसंगति

जांच समिति ने वर्ष 2021 और 2022 की परीक्षाओं से संबंधित उत्तर-पुस्तिकाओं के अभिलेखों में भी गंभीर विसंगतियां पाईं। जांच में सामने आया कि क्रय की गई कुल उत्तर-पुस्तिकाओं की तुलना में उपयोग की गई और शेष बची उत्तर-पुस्तिकाओं की संयुक्त संख्या अधिक थी। इस अंतर के संबंध में कोई संतोषजनक अभिलेखीय स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं था। इससे परीक्षा सामग्री के नियंत्रण, अभिरक्षा और लेखा संधारण की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे।

संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के सिद्धांतों का पालन प्रभावित

जांच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण में पाया गया कि दोनों परीक्षाओं में अनियमितताएं किसी एक अभ्यर्थी अथवा परीक्षा के किसी एक चरण तक सीमित नहीं थीं। इनका संयुक्त प्रभाव परीक्षा की शुचिता, गोपनीयता, पारदर्शिता, निष्पक्षता, मेरिट निर्धारण और आरक्षण व्यवस्था पर पड़ा। विभाग ने पाया कि चयन प्रक्रियाओं में संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 में निहित समानता तथा लोक नियोजन में समान अवसर के मूल सिद्धांतों का समुचित पालन सुनिश्चित नहीं हो सका।

विभाग द्वारा संपूर्ण परीक्षाओं को निरस्त किए बिना केवल अनियमितताओं से लाभान्वित अभ्यर्थियों के विरुद्ध कार्रवाई करने, उत्तर-पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराने तथा संशोधित मेरिट सूची तैयार करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया गया। हालांकि मूल अभिलेखों की स्थिति और व्यापक प्रक्रियागत खामियों के कारण प्रभावित एवं अप्रभावित अभ्यर्थियों को विश्वसनीय रूप से अलग करना संभव नहीं पाया गया। जांच में सामने आई अनियमितताओं को व्यापक एवं प्रणालीगत प्रकृति का मानते हुए संपूर्ण परीक्षा एवं चयन प्रक्रियाओं को निरस्त करना आवश्यक पाया गया।

तीनों नियुक्ति आदेश निरस्त

कार्यालय आयुक्त, राज्य कर द्वारा जारी आदेशों के अनुसार 19 दिसंबर 2021 और 26 जून 2022 को आयोजित सीमित प्रतियोगिता परीक्षाओं को प्रारंभ से शून्य घोषित करते हुए इनके आधार पर संपन्न संपूर्ण चयन प्रक्रियाएं निरस्त कर दी गई हैं। इसके फलस्वरूप वर्ष 2021 की परीक्षा के आधार पर 27 दिसंबर एवं 30 दिसंबर 2021 को जारी दो नियुक्ति आदेश तथा वर्ष 2022 की परीक्षा के आधार पर 1 जुलाई 2022 को जारी नियुक्ति आदेश भी निरस्त कर दिए गए हैं।

आदेशों के तहत दोनों सीमित प्रतियोगिता परीक्षाओं के आधार पर वाणिज्यिक (राज्य) कर निरीक्षक के पद पर नियुक्त सभी प्रभावित कर्मचारी अपने पूर्व मूल पदों पर प्रत्यावर्तित होंगे। उन्हें राज्य कर निरीक्षक के पद पर नियुक्ति से पहले के मूल पद एवं मूल पदस्थापना पर पदस्थ माना जाएगा। दोनों आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। राज्य जीएसटी विभाग की यह कार्रवाई विभागीय भर्ती एवं चयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता, संवैधानिक प्रावधानों के पालन तथा प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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