नवापारा में सरकारी योजना चंदे के सहारे! नेता प्रतिपक्ष संध्या राव ने पालिका प्रशासन से मांगा जवाब

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– नवापारा शहर के बेघर, गरीब और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित आश्रय देने के उद्देश्य से संचालित केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम आश्रय योजना की व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि जिस योजना के तहत जरूरतमंदों को आवास, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए, उसी आश्रय स्थल का संचालन चंदे के भरोसे किया जा रहा है। संचालन में जुटी महिला समूह की सदस्यों को भुगतान नहीं मिलने की बात भी सामने आई है।
इस मुद्दे को लेकर नगर पालिका की नेता प्रतिपक्ष संध्या राव ने पालिका प्रशासन से जवाब मांगा है और योजना के संचालन से जुड़ी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
केंद्र की योजना संचालन के लिए चंदे का सहारा?

पीएम आश्रय योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में बेघर लोगों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराना है। इसके तहत गरीब, बुजुर्ग, दिव्यांग और मानसिक रूप से बीमार जरूरतमंदों के लिए 24 घंटे खुले रहने वाले स्थायी आश्रय स्थलों की व्यवस्था की जाती है। यहां रहने वालों को आवास के साथ भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
लेकिन गोबरा नवापारा में इस आश्रय स्थल के संचालन को लेकर उठ रहे सवालों ने व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आरोप है कि आश्रय स्थल का संचालन करने वाले एएलएफ महिला समूह की सदस्य महिलाएं बिना भुगतान के काम कर रही हैं और व्यवस्था चलाने के लिए चंदा जुटाने का सहारा लिया जा रहा है। यदि यह स्थिति सही है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि योजना के संचालन के लिए निर्धारित राशि कहां जा रही है और जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक इस पर क्या कदम उठाए हैं?
नेता प्रतिपक्ष संध्या राव ने प्रशासन से मांगा हिसाब
नेता प्रतिपक्ष संध्या राव ने इस मामले में नगर पालिका प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा है। उन्होंने आश्रय स्थल के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं और वित्तीय लेन-देन की जानकारी सामने लाने की मांग की है। उनका सवाल है कि वर्तमान में आश्रय स्थल का संचालन किस महिला समूह द्वारा किया जा रहा है और उस समूह को इसके लिए कितनी राशि उपलब्ध कराई जा रही है।
यदि संचालन करने वाले समूह को कोई भुगतान नहीं मिल रहा है, तो इसके पीछे क्या कारण हैं? क्या योजना के लिए मिलने वाली राशि जारी नहीं की जा रही है, या फिर भुगतान की प्रक्रिया में कोई बाधा है?
क्या बंद होने की कगार पर है आश्रय योजना?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल आश्रय स्थल के भविष्य को लेकर है। यदि संचालन करने वाली महिलाओं को भुगतान नहीं मिल रहा और व्यवस्था चंदे के सहारे चल रही है, तो यह स्थिति लंबे समय तक कैसे बनी रह सकती है? क्या योजना का संचालन नियमित रूप से जारी है? जरूरतमंदों को मिलने वाली सुविधाओं पर इसका क्या असर पड़ रहा है?
संध्या राव ने मांग की है कि पालिका प्रशासन आश्रय स्थल को मिलने वाली राशि, संचालन करने वाले समूह और अब तक किए गए भुगतान का पूरा ब्योरा सामने रखे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि यदि चंदे से संचालन किया जा रहा है, तो इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
प्रशासन के जवाब पर टिकी निगाहें
बेघर और जरूरतमंद लोगों के लिए आश्रय स्थल केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सुरक्षित जीवन का सहारा है। ऐसे में इसके संचालन और वित्तीय व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन इन सवालों पर क्या जवाब देता है और आश्रय स्थल के संचालन को सुचारु बनाने के लिए क्या कदम उठाता है।
पत्र जारी किया जा रहा है
इस पूरे मामले में मुख्य नगरपालिका अधिकारी लवकेश कुमार पैकरा ने कहा कि संचालन समूह को पत्र जारी किया जा रहा है।
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