नवापारा में 2003 बैच का भव्य समागम: गुरुजनों का हुआ सम्मान, आंखों में खुशी और यादों में बीता बचपन

23 साल बाद फिर उसी कक्षा में गूंजे गुरु के सबक, भावुक हुए शिक्षक-शिष्य

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– नवापारा नगर के सरस्वती शिशु मंदिर में रविवार, 30 अगस्त 2026 को वर्ष 2003 के बारहवीं कक्षा के प्रथम बैच के पूर्व छात्र-छात्राओं द्वारा भव्य ‘शिक्षक सम्मान एवं पूर्व छात्र सम्मेलन’ आयोजित किया गया। 23 वर्षों बाद एक ही मंच पर गुरु और शिष्य आमने-सामने हुए तो पूरा वातावरण पुरानी यादों, आत्मीयता और भावनाओं से भर गया। रिमझिम बारिश के बीच आयोजित इस आयोजन में बड़ी संख्या में पूर्व छात्र-छात्राओं सहित आचार्यगण शामिल हुए।

पुष्प वर्षा से हुआ गुरुजनों का स्वागत

समारोह की शुरुआत दूर-दराज से पहुंचे आचार्यों एवं दीदियों के आत्मीय स्वागत से हुई। पूर्व छात्रों ने गुरुजनों पर पुष्प वर्षा करते हुए उन्हें ससम्मान मंच तक पहुंचाया। इसके बाद मां सरस्वती की वंदना, तिलक एवं वंदन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। पूर्व छात्र-छात्राओं के आत्मीय परिचय सत्र के साथ बचपन की यादों को ताजा करने वाले मनोरंजक खेलों ने माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया।

दोपहर में सहभोज के बाद मुख्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। उद्बोधन के पश्चात समस्त आचार्यों एवं दीदियों को श्रीफल, पुष्पमाला, प्रतीक चिह्न एवं उपहार भेंटकर सम्मानित किया गया। वर्षों बाद अपने शिष्यों के बीच पहुंचे गुरुजन भी इस दौरान भावुक नजर आए। शिष्यों की आत्मीयता और सम्मान ने पुराने दिनों की यादें ताजा कर दीं।

कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष विनोद शर्मा एवं व्यवस्थापक प्रफुल्ल दुबे की विशेष उपस्थिति रही। साथ ही वरिष्ठ आचार्य गोपाल यादव, राजकुमार क्षत्रिय, दीपक शुक्ला, राकेश तिवारी, नरेश यादव, कृष्ण कुमार वर्मा, गिरिजा शंकर त्रिपाठी, भारत लाल साहू, भरत लाल साहू, गौकरण साहू, भोजराम साहू, श्रीनिवास शुक्ला, नरेंद्र साहू, संदीप साहू, घनश्याम साहू, मनोज ठाकुर एवं अजय दीवान उपस्थित रहे।

दीदीगण भावना सोमैया, मनोज साहू, पल्लवी शर्मा तथा तत्कालीन सेवाभावी सदस्य पुष्पा साहू, रुक्मिणी सेन एवं रामप्रसाद निषाद की गरिमामयी उपस्थिति भी रही।

वरिष्ठ छात्र भी हुए शामिल 

कार्यक्रम में सीनियर बैच से मौसम गंगवाल, पुष्पांजलि पांडे, श्रीकांत साहू, कुमार वर्मा एवं आकाश जैन भी शामिल हुए। वरिष्ठ बैच के पूर्व छात्रों ने भी पुराने दिनों की यादें साझा करते हुए गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त किया और 2003 बैच के इस अनूठे मिलन समारोह की सराहना की।

नारी शक्ति ने संभाली आयोजन की कमान

इस पूरे आयोजन की कमान वर्ष 2003 की बारहवीं कक्षा की पूर्व छात्राओं ने प्रभावी ढंग से संभाली। गुरुजनों को पुनः एक सूत्र में जोड़ने से लेकर मंच संचालन और कार्यक्रम के सफल समापन तक खुशबू जैन, शिल्पी साहू, संगीता कौशिक, पूनम पांडे, भावना दुबे, हेमलता साहू, आरती फोटणी, माधवी गुप्ता, आकांक्षा परिहार एवं मीनाक्षी साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

साकार हुआ यादगार आयोजन

आयोजन को भव्य स्वरूप देने में 2003 बैच के सभी सहपाठियों का उल्लेखनीय योगदान रहा। पूर्व छात्र एवं नवापारा के गौरव अपर कलेक्टर राकेश कुमार गोलछा ने आयोजन के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली, वहीं महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुमित गंडेचा ने आयोजन को व्यवस्थित रूप दिया।

एक वर्ष पहले इस मिलन समारोह की नींव रखने वाले आकाश गंगवाल, प्रितेश पारख तथा टेंट, फ्लेक्स और फोटोग्राफी की व्यवस्था संभालने वाले डिगेश्वर साहू आयोजन के प्रमुख स्तंभ रहे। भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी आलोक आठवानी एवं भरत राजपाल ने संभाली। समारोह को जीवंत बनाने में पीयूष कोचर, डॉ. रोहन दीक्षित, अभिषेक गुप्ता, योगेश आठवानी, रवि मूलचंदानी, समीर जैन, अरुण सिन्हा, गौरव शर्मा, निखिल बाफना, संतोष सिन्हा सहित प्रथम बैच के सभी साथियों की सक्रिय सहभागिता रही। महाराष्ट्र से सपरिवार पहुंचे हेमंत जांभुलकर की मौजूदगी भी रही।

सांख्यिकी विभाग के अधिकारी सागर शर्मा ने आधुनिक शिक्षा पर अपना उद्बोधन दिया। पार्षद तुषार कदम ने संस्था के संचालन से जुड़े विषयों पर अपने महत्वपूर्ण विचार रखे। 

23 साल बाद उसी कक्षा में लौटे शिष्य

समारोह का सबसे भावुक और यादगार क्षण वह रहा, जब वर्ष 2003 के पूर्व छात्र-छात्राएं 23 साल बाद उसी कक्षा में पहुंचे, जहां कभी उन्होंने अपने गुरुजनों से जीवन के महत्वपूर्ण ज्ञान हासिल किए थे। उसी कक्षा में पुराने शिष्यों को दोबारा संबोधित करते हुए गुरुजन भी भावुक हो उठे।

गुरुजनों ने अपने पूर्व छात्रों की उपलब्धियों और आत्मीयता पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने और समाज के लिए बेहतर कार्य करने का आशीर्वाद दिया। वहीं पूर्व छात्रों ने भी कहा कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनके गुरुजनों द्वारा दिए गए संस्कार, अनुशासन और शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है।

23 वर्षों बाद हुआ यह गुरु-शिष्य मिलन केवल एक पूर्व छात्र सम्मेलन नहीं, बल्कि संस्कारों, रिश्तों और उन सुनहरी यादों की वापसी थी, जिन्हें समय भी धुंधला नहीं कर सका।

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