निजी अस्पताल में महिला की मौत पर बवाल! परिजनों का आरोप इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत; मेडिकल चार्ट नहीं दिखाने के भी आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो गई। घटना के बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, इलाज में इस्तेमाल दवाओं की जानकारी देने और संबंधित डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता की जांच करने की मांग की है। मामला बिलासपुर जिले के मोकपा क्षेत्र का है।
त्रिपुरा से बिलासपुर घूमने आई थीं महिला
मिली जानकारी के अनुसार, त्रिपुरा निवासी आनंदित भट्टाचार्य पति शंकर भट्टाचार्य पेट के हिस्से में कैंसर से पीड़ित थीं। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें 22 अक्टूबर की शाम मोपका स्थित शिव मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराए जाने के समय महिला बातचीत कर पा रही थीं। रात करीब आठ बजे के बाद इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी। अगले दिन यानी 23 अक्टूबर की सुबह करीब सात बजे उनकी मौत हो गई।
दो घंटे के अंतराल में इंजेक्शन लगाने का आरोप
मृतका के भतीजे सुमित कुमार चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि महिला को करीब दो घंटे के अंतराल में दो बार इंजेक्शन लगाया गया। परिजनों का दावा है कि निर्धारित एक एमएल की जगह 10 एमएल इंजेक्शन दिए जाने के कारण महिला की हालत बिगड़ी।
मेडिसिन चार्ट नहीं दिखाने का आरोप
परिजनों ने इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं और इंजेक्शन की जानकारी हासिल करने के लिए मेडिसिन चार्ट मांगे जाने के बावजूद रिकॉर्ड नहीं दिखाए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि रात के समय आईसीयू में डॉक्टर की अनुपस्थिति भी चिंता का विषय रही।
इसके अलावा, परिजनों ने अस्पताल संचालक डॉ. संजय सिंह पर बदसलूकी करने और धमकी देने का आरोप लगाया है। परिजनों की मांग है कि इन सभी आरोपों की अलग-अलग जांच हो और इलाज के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की समीक्षा की जाए।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि महिला को कौन-सी दवाएं दी गईं, इंजेक्शन की मात्रा कितनी थी और इलाज के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं। उन्होंने संबंधित डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर पात्रता की भी जांच की मांग की है।
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