3 महीने में 8 मौतों का सनसनीखेज खुलासा: जहर मिला शराब पिलाकर लोगों को मारता रहा आरोपी, इधर गांव में नरबलि की फैली थी दहशत
साइको किलर गिरफ्तार

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– छत्तीसगढ़ के एक गांव में पिछले तीन महीनों के दौरान हुई 8 रहस्यमयी मौतों का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। एक के बाद एक हो रही मौतों से पूरे गांव में दहशत का माहौल था और तरह-तरह की अफवाहें फैल रही थीं। जांच में सामने आया कि सभी मौतों के पीछे एक ही व्यक्ति का हाथ था, जिसने पुरानी रंजिश और व्यक्तिगत कारणों से लोगों को शराब में जहर मिलाकर पिलाया। पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है, जिसके बाद पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ।
मिली जानकारी के अनुसार बलौदाबाजार जिले के कसडोल थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खर्वे में पिछले चार महीनों के दौरान हुई 8 संदिग्ध मौतें हुई थी। इस मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। गांव में एक के बाद एक हो रही मौतों से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल था। पुलिस की गहन जांच में सामने आया कि इन सभी मौतों के पीछे गांव का ही निवासी रामसहाय जायसवाल (46 वर्ष) था, जिसने छोटी-छोटी पुरानी रंजिशों के चलते अपने परिचित लोगों को योजनाबद्ध तरीके से मौत के घाट उतार दिया।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने हत्या की साजिश रचने से पहले जहर का परीक्षण एक कुत्ते पर किया था। कुत्ते की मौत होने के बाद उसे यकीन हो गया कि जहर काम करेगा। इसके बाद उसने चूहा मारने के नाम पर सुहागा (जहरीला पदार्थ) खरीदा और उसे शराब में घोलकर अपने परिचितों को पिलाना शुरू कर दिया। आरोपी ने पुरानी दुश्मनी, गाली-गलौज, आपसी विवाद, कर्ज के लेन-देन, पत्नी पर गलत नजर रखने के शक तथा टोना-टोटका जैसी आशंकाओं के कारण अलग-अलग लोगों को निशाना बनाया।
एक के बाद एक 8 मौतें
फरवरी से मई 2026 के बीच गांव में लगातार मौतों का सिलसिला जारी रहा। सबसे पहले 6 फरवरी को बद्री पटेल की मौत हुई। इसके बाद 20 फरवरी को बुढालू साहू, 12 मार्च को बुधराम जायसवाल, 20 मार्च को छत्तूराम साहू, 31 मार्च को विनोद साहू, 28 अप्रैल को गजानंद मांझी, 29 अप्रैल को चैतूराम साहू और 14 मई को महेतरू साहू की मौत हो गई। सभी मामलों में एक समान तथ्य यह सामने आया कि मृतकों ने मौत से पहले शराब का सेवन किया था।
लगातार हो रही मौतों के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश बढ़ने लगा। 6 जून को बड़ी संख्या में ग्रामीण कसडोल थाना पहुंचे और मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए एक आवेदन सौंपा। ग्रामीणों ने गांव के ही एक व्यक्ति पर संदेह जताया था। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य जुटाए, ग्रामीणों से पूछताछ की और घटनाओं के बीच समान कड़ियों को जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई।
शवों को कब्र से निकलवाया

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सात मृतकों के शवों को कब्र से निकलवा कर पोस्टमॉर्टम एवं फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा था। एक मृतक बुधराम जायसवाल का अंतिम संस्कार पहले ही किया जा चुका था, इसलिए उसका शव उपलब्ध नहीं हो सका। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी ने चूहा मारने के बहाने जहरीला पदार्थ खरीदा था। फॉरेंसिक और अन्य तकनीकी साक्ष्यों ने भी जांच को नई दिशा दी।
पुलिस ने जब संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने शुरू में लगातार गुमराह करने की कोशिश की और आरोपों से इनकार करता रहा। लेकिन कड़ी पूछताछ के बाद वह टूट गया और उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। आरोपी ने बताया कि उसने अलग-अलग अवसरों पर लोगों को शराब पिलाते समय उसमें जहर मिलाया था।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि किसी को अपने ऊपर शक न हो, इसके लिए आरोपी बेहद चालाकी से व्यवहार करता था। वह कई बार पीड़ितों को अस्पताल ले जाने में मदद करता था और मृतकों के कफन-दफन तथा अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था। इस वजह से लंबे समय तक किसी को उस पर संदेह नहीं हुआ।
आरोपी को किया गिरफ्तार

आज मंगलवार को पुलिस आरोपी को उसके घर, दुकान और घटनास्थलों पर लेकर पहुंची, जहां उसकी निशानदेही पर शराब में मिलाया जाने वाला जहरीला पदार्थ बरामद किया गया। आरोपी को गांव में देखकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और ग्रामीणों ने उसे जमकर गालियां दी।
इस बीच गांव में यह चर्चा भी फैल गई थी कि किसी गड़े हुए खजाने को पाने के लिए 21 लोगों की बलि देने की योजना बनाई गई है और अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच में इस तरह के किसी भी दावे के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस के अनुसार अब तक की जांच में सामने आया है कि हत्याओं के पीछे मुख्य कारण व्यक्तिगत रंजिश, बदला और मानसिक विकृति थी।
पुलिस ने आरोपी रामसहाय जायसवाल पिता देवप्रसाद, उम्र 46 वर्ष, निवासी पुराना खर्वे, थाना कसडोल को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ 8 हत्या और 1 हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। यह मामला हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ के सबसे सनसनीखेज और भयावह सामूहिक हत्याकांडों में से एक माना जा रहा है।
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