ब्रेकिंग : गरियाबंद के उप निरीक्षक निलंबित, पैसों के लेन-देन का ऑडियो सोशल मीडिया पर हुआ था वायरल, जानिए पूरा मामला

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक ऑडियो में कथित रूप से पैसों के लेन-देन की बातचीत सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक गरियाबंद ने तत्काल संज्ञान लेते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मामले में प्रथम दृष्टया संलिप्त पाए गए थाना गरियाबंद में पदस्थ उप निरीक्षक अजय सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार पुलिस जांच में सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो में एक पुलिस अधिकारी द्वारा पैसे के लेन-देन को लेकर बातचीत की जा रही है। जांच के दौरान ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज उप निरीक्षक अजय सिंह की होना प्रारंभिक तौर पर स्पष्ट पाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उप निरीक्षक अजय सिंह को निलंबित कर दिया। आदेश में कहा गया है कि एक अनुशासित विभाग में जिम्मेदार पद पर रहते हुए उनके आचरण में पदीय कर्तव्यों के प्रति संदिग्ध व्यवहार, स्वेच्छाचारिता एवं अनुशासनहीनता पाये जाने से उप निरीक्षक अजय सिंह थाना गरियाबंद को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है और विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
क्या है आडियो में
इस मामले में दो आडियो वायरल हो रहे है पहले ऑडियो के अनुसार एक महिला से उप निरीक्षक किसी नंदू के बारे में पूछते हैं और फोटो लाने की बात कहते हैं। जिस पर महिला तबीयत खराब होने पर उसे सोया हुआ बताती है, जिसके बाद वह कहती है फ़ोटो मै ले के आ जाती हुँ और महिला 10 हजार रुपए वापस दिलाने की बात भी पूछती है, जिस पर उप निरीक्षक कहते हैं कि आ जाओ, डीएसपी से मिलवा दूंगा, पैसा वहीं है, वापस दिलवा देंगे।
दूसरे ऑडियो में उप निरीक्षक से एक युवक बातचीत करते हुय कहता है कि कल आपका फोन आया था, आपसे बात नहीं हो पाई, जिसके बाद उप निरीक्षक ने कहा कि फ़ोटो लेकर आओ, फिर युवक कहता है कि आप ने 10 हजार मांगे थे, दे दिया, लेकिन कोई काम नहीं हुआ, हमें अंदर जाना पड़ा। इस पर उप निरीक्षक कहते हैं कि पैसा उन्हें भी नहीं मिला, बल्कि “पूरा पैसा डीएसपी ने ले लिया है” और पूरा मामला उन्हीं ने हैंडल किया है।
बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला एक महिला पर हुए हमले से जुड़ा है, जिसमें दो जनप्रतिनिधियों पर हमला करने का आरोप है। हमला करने वाले जनप्रतिनिधियों के बदले पीड़ित परिवार पर ही प्रकरण दर्ज करने की बात कही गई। पीड़ित परिवार से प्रकरण ना दर्ज करने की एवज में ₹10000 की रिश्वत दी गई है।
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