​शासकीय तालाब पर दबंगों का कब्ज़ा : नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा व्यावसायिक उपयोग, ग्रामीणों ने की कार्यवाही की मांग

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– गरियाबंद जिले के ग्राम किरवई में सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जहाँ सार्वजनिक उपयोग के लिए बने शासकीय तालाब को कुछ रसूखदारों ने निजी व्यावसायिक गतिविधियों का अड्डा बना दिया है।

ग्रामीणों के अनुसार बिना किसी वैधानिक अनुमति के तालाब में व्यावसायिक मछली पालन किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ सरकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है, बल्कि ग्रामीणों के पारंपरिक अधिकार और सुविधाएँ भी प्रभावित हो रही हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और प्रशासन से कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, राजिम क्षेत्र के किरवाई गाँव का यह तालाब राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय भूमि दर्ज है। नियमानुसार इस तरह के जल स्रोतों पर पूरे गाँव का हक होता है, या फिर प्रशासन द्वारा नियत प्रक्रिया के तहत इसका पट्टा जारी किया जाता है। लेकिन यहाँ सभी नियमों को ताक पर रखकर, बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के तालाब को पूरी तरह से व्यावसायिक केंद्र में तब्दील कर दिया गया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस अवैध अतिक्रमण के कारण गाँव के मवेशियों के लिए पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। विरोध करने पर ग्रामीणों को डराया-धमकाया जाता है। गाँव में इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस अवैध कारोबार ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि इसकी शिकायत पहले भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि ज़िम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले से आँखें मूँदे बैठे हैं, जिससे अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं।

कार्यवाही की मांग

गाँव के जागरूक ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन और खनिज/मत्स्य विभाग के उच्च अधिकारियों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की माँग की है। ग्रामवासियों ने ​शासकीय तालाब से तुरंत अवैध अतिक्रमण हटाये जाने, बिना अनुमति व्यावसायिक लाभ कमाने वालों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई करने और ​तालाब को पुनः ग्रामीणों और मवेशियों के नि:शुल्क उपयोग के लिए मुक्त करने की मांग की है।

​इस संबंध में ग्राम पंचायत ने तहसीलदार को आवेदन दिया है, उन्होंने मामले की जाँच करवाकर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक कुंभकर्णी नींद से जागता है और शासकीय संपत्ति को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराता है।

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