मगरलोड में भव्य गायत्री महायज्ञ का आयोजन: 16 गर्भवती महिलाओं का कराया गया पुंसवन संस्कार

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– गायत्री परिवार ट्रस्ट मगरलोड के तत्त्वावधान में स्थानीय शक्तिपीठ में भव्य गायत्री महायज्ञ का गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। भक्तिमय वातावरण और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित इस महायज्ञ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 16 गर्भवती महिलाओं का एक साथ कराया गया ‘पुंसवन संस्कार’ रहा, जिसमें आने वाली संतान के उज्ज्वल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य की मंगल कामना की गई।

वैदिक मंत्रोच्चार और सुमधुर प्रज्ञा गीतों से परिसर गूंज उठा।यज्ञ और संगीत टोली का कुशल संचालन बहन गीतांजलि साहू, दीपा साहू, हेमलता साहू एवं लुकेश्वरी दीवान द्वारा किया गया। उनकी सुमधुर टोली ने वैदिक रीति-रिवाज से हवन-पूजन संपन्न कराया। कार्यक्रम के दौरान लक्ष्मी साहू ने प्रेरणादायक प्रज्ञा गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्ति और आध्यात्मिकता से सराबोर हो गया।

पुंसवन संस्कार की मुख्य वक्ता रूखमणी बंछोर ने संस्कार के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, कि “भारतीय संस्कृति में 16 संस्कारों का विशेष स्थान है। पुंसवन संस्कार गर्भस्थ शिशु को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से बलिष्ठ बनाने का कार्य करता है।

गर्भस्थ शिशु पर प्रभाव पड़ता है

उन्होंने बताया कि माँ के विचार और आचरण का सीधे तौर पर गर्भस्थ शिशु पर प्रभाव पड़ता है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान सकारात्मक सोच और सात्विक वातावरण अत्यंत आवश्यक होता है, साथ ही एक बच्चे के अवचेतन मन का 80% विकास, माँ के गर्भ में हो जाता है इसलिए एक माँ के द्वारा बच्चे का 80% निर्माण गर्भ में ही हो जाता है, आज के समय में बच्चों में संस्कार, राष्ट्र भक्ति, व नैतिकता की निरंतर गिरावट हो रही है जिसे गर्भ संस्कार के माध्यम से उठाया जा सकता है।

संतोष कुमार साहू ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी सुमित गंडेचा, पर्यवेक्षक लोमेश तारन एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। साथ ही इस सफल आयोजन के लिए पूरी टीम की सराहना की। परिजन गोविंद राम साहू ने कहा, कि “गायत्री महायज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह समाज में नैतिक मूल्यों और सद्विचारों के प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजनों से समाज में संगठनात्मक ऊर्जा और भ्रातृत्व की भावना सुदृढ़ होती है।”

वहीं मैन सिंह हिरवानी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, कि “आज की युवा पीढ़ी को अपनी सनातन परंपराओं और वैज्ञानिक संस्कारों से जोड़ने की सख्त आवश्यकता है। गायत्री परिवार का यह प्रयास सराहनीय है कि वे घर-घर तक संस्कारों की इस पावन धारा को पहुँचा रहे हैं।

कार्यक्रम में सभी गर्भवती बहनों को युग साहित्य, मंत्र लेखन बलि वैश्व स्टीकर मां भगवती महिला मण्डल राजिम की ओर से भेट की गई। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी सुमित गंडेचा एवं पर्यवेक्षक लोमेश तारन का सम्मान किया गया।

आभार एवं समापन

कार्यक्रम के अंत में शक्तिपीठ मगरलोड के अध्यक्ष आसकुमार साहू ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी कार्यकर्ताओं, संगीत टोली, वक्ताओं तथा दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। राजिम शक्तिपीठ से पधारे सभी बहनों का प्रज्ञापीठ मगरलोड के परिजनों द्वारा श्रीफल से सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम मे योगेश यादव, प्रेम लाल साहू, राधे लाल सिन्हा, संतोष सिन्हा, विद्या देवी साहू, राजकुमारी साहू उपस्थित रहे।

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